Never Quit | Hindi motivational story |
यार ये ज़िन्दगी किस बला का नाम है
सारी उम्र इंसान किसी का किसी कशमकश मे लगा ही रहता है
बचपन मे पढाई , बड़े हुए तो कॉलेज , कॉलेज से निकले तो नौकरी और नौकरी के बाद छोकरी फिर बच्चे और न जाने क्या क्या चलता ही रहता है जब तक मर नही जाते ।
वैसे ज़िन्दगी का मजा भी इन्ही सब में है ,वरना एक बार सोच के देखये अगर ये सब ना हो तो ज़िन्दगी कैसी हो ?
चलो सोचने का काम बाद मे करेंगे इससे पहले आप कहे की ये तो फिलॉसफी झाड़ने लगा, स्टोरी पर आते है ।
ये कहानी है गौरव की जो मैं आपको उसी की जुबानी सुनाने जा रहा हु ।।
मेरा नाम गौरव
मेरे घर मे मम्मी-पापा , 1 छोटा भाई और 1 छोटी बहन है, हमारा ये छोटा सा परिवार कानपुर के अशोक विहार मे रहता है।
पापा डाक विभाग मे क्लिर्क है जो कभी डॉक्टर बनना चाहते थे लेकिन पढाई के लिए घर से पर्याप्त संसाधन न मिलने के कारण सिर्फ क्लिर्क बनकर रह गए , माँ घर सभालती है और भाई बहन अभी स्कूल में पढ़ते है।
मेरी कहानी शुरू होती है
राजस्थान के कोटा शहर मे मेरे हॉस्टल के एक 8×8 के रूम से , कोटा राजस्थान का एक छोटा सा खूबसूरत शहर है जो 10-12 साल पहले कोटा स्टोन और तेल रिफानरी के लिए फेमस था लेकिन अब यहाँ की कोचिंग के लिए पूरे भारत मे फैमस है यहाँ हर साल लाखो स्टूडेंट्स मेडिकल और इंजनियरिंग कॉम्पिटिशन एग्जाम क्रैक करने के सपने लेकर करने आते है, कुछ के पूरे होते है और कुछ के टूट जाते है।
उन्ही मे से एक मैं था।
मैं कानपुर से यहाँ कोटा मेडिकल एंट्रेंस की कोचिंग करने 6 महीने पहले आया था । घर से चलते हुए दुआओ के साथ घर वालो ने उम्मीदों का पुलिंदा भी साथ बांध दिया था । पापा अक्सर कहते थे ," बेटा हम जो नही कर पाये वो तुम्हे करना है , तुम्हे हमारे सपने पूरे करने है।
पता नही भारतीय संस्कृति मे न जाने कहा लिखा है की बाप के अधूरे सपने बेटे को ही पुरे करने होते है।
शायद उन्होंने हमे जन्म दिया इसलिए इतना हक़ बनता है उनका , मैं भी यही सोचकर मेडिकल फील्ड मे दिलचस्पी न होने के बाबजूद पिछले 2 साल से लगा हुआ था ।
ऐसा नही था की मैं पढाई मे कमजोर था , मैं तो 12th मे अपने स्कूल का टॉपर था लेकिन न जाने क्यों मेडिकल फील्ड मे जाने का मन नही करता था , मेरा मन तो बस क्रिएटिव चीजो मे लगता था, मुझे लिखना बहुत पसंद था मुझे राइटर बनना था लेकिन घर वालो को ये सब कहा समझ आता है ।
उन्हें तो बस डॉक्टर की सैलरी और स्टेटस दिखता था।
मैं पहले भी 1 साल कानपूर कोचिंग कर चुका था लेकिन सिलेक्शन नही हुआ था। तब भी घर पर बहुत सुनने को मिली थी
यहाँ तक के रिजल्ट वाले दिन दूर के उन रिस्तेदारो का भी फोन आया था जिनकी आज तक मैंने शक्ल भी नही देखी थी।
पता नही इन रिस्तेदारो को दूसरो के बच्चों मे इतनी दिलचस्पी क्यों होती है , खुद का पप्पू बेटा भले ही बाहरवी से आगे ना पढ़ा हो लेकिन दूसरो के बच्चों को खुब ज्ञान बाटते है ये लोग।
खैर मुझपर वैसे इन लोगो की बातो का ज़्यादा असर नही होता था क्योंकि मैं कभी इनको सीरियसली नही लेता था
लू भी क्यों ,लाइफ मेरी है और उसपर सिर्फ मेरा हक़ है और मेरे माँ-बाप का ।
कोटा आये हुए मुझे 6 महीने हो गए थे। यहाँ की कोचिंग तो बहुत अच्छी थी
सारे टीचर्स अपने अपने सब्जेक्ट के महारथी थे लेकिन यहाँ बच्चों पर प्रेशर ज़्यादा होता है ,एक एक क्लास मे 250 बच्चे एक साथ पढ़ते है। क्लास मे कुछ पूछने कि मेरे जैसे सामान्य और शर्मीले बच्चे की हिम्मत तक नही होती ।
क्लास मे तो सब समझ आ जाता था लेकिन मैं भूलता भी उतनी ही जल्दी इस वजह से कोचिंग मे होने वाले टेस्ट मे नंबर नही आते थे ।
उन टेस्ट का रिजल्ट मेरे लिए एक बम जैसा होता था जो हर 21 दिन में फटता तो कोचिंग से गए मैसेज के रूप में हमारे घर पर था लेकिन उसकी चपेट में हजारों किलोमीटर दूर बैठा मैं आता था ।
टेस्ट में नंबर कम आने की वजह से पापा अक्सर नाराज हो जाते थे और बाप बेटे के मजबूत रिश्ते में दूरियां आती जाती , मैं कभी कभी तो उनका फोन भी रिसीव नहीं करता था।
उनका नाराज होना भी कुछ हद तक सही ही था
पापा की मेहनत की कमाई और बाकी परिवार वालो की उम्मीदें खर्च हो रही थी मुझ पर
लेकिन मैं शायद उनकी उम्मीदों पर खरा नही उतर पा रहा था।
मैं पूरी कोशिश करता लेकिन जिस काम को करने में अंदर से खुशी ना मिलती हो जिसमें तुम थका हुआ महसूस करते हो उसमे ऐसा ही होता है मेहनत करने के बाद भी मेरे रिजल्ट मे थोडा बहुत ही सुधार होता और टेस्ट का रिजल्ट आते ही सारा कॉन्फिडेंस ऐसे गिरता जैसे रेट पर बनाया हुआ बच्चो का घर। उस समय मन करता की जबाब दे दू की ये नहीं है हमारे बस का "हमसे ना हो पायेगा", लेकिन मैं ऐसा नही कर सकता था एक साथ इतने सपने और उम्मीद तोड़ने की हिम्मत नहीं थी मुझमें अभी ।
आज फिर मेरे टेस्ट का रिजल्ट आया था जो पहले टेस्टो से भी थोडा ख़राब था , आर्गेनिक केमिस्ट्री की रिएक्शन मैकेनिज्म हमारी कमजोर कड़ी थी जो इस टेस्ट मे अपने पूर्ण विस्तार से आई थी ।
जैसा हर बार होता था इस बार भी हुआ रिजल्ट का मैसेज पापा को पहुच चुका था , मैसेज मिलते ही पापा का कॉल आना लाजमी था , कॉल आया , हिम्मत करके फ़ोन रिसीव किया , हमने प्रणाम किया, पापा ने भी हमारा हाल- चाल पूछ लिया और आ गए मुद्दे की बात पर ,
"बेटा क्या कर रहे हो तुम वहा इतनी बढ़िया कोचिंग मे पढ़ा रहे है, तुम्हे सारी अच्छी सुविधाएं दी हुई है और तुम हो के कुछ कर ही नही पा रहे हो।
हमने बहुत कोशिश की उन्हें समझाने की लेकिन वो नही समझे, समझते भी कैसे उनकी मेहनत की कमाई और सपना दोनों दाव पर लगे जो थे । हमने उन्हें और मेहनत करने का भरोसा दे के फ़ोन काट दिया , ये पहली बार था जब मैंने पापा का फ़ोन उनसे पहले कटा हो।
आज कोचिंग मे भी एक टीचर ने रिजल्ट आने के बाद पूरी क्लास के सामने कम नंबर वाले बच्चों को सुना दी के बेटा अगर डॉक्टर नही बने तो कुछ नही कर पाओगे आगे ,कभी कभी टीचर भी ऐसी ही बाते करते जो मनोबल तोड़ देती थी । यहां कॉम्पटीशन का बहुत भयंकर माहौल था आचे अच्छे टूट जाते थे।
ऐसा नही था की सारे टीचर ऐसी ही बाते करते हो ज़्यादातर टीचर मोटीवेट ही करते थे
लेकिन शायद ये हम मनुष्य का नेचर है की हमपर पॉजिटिव बातों से ज़्यादा असर नेगेटिव बातो का होता है ।
यही हाल मेरा था आज 2-2 जगह सुनकर मेरा दिमाग खराब हो गया था
मैं थक चूका था अपनी असफलता से और असफलता को छुपाने के बहाने बना बना कर इसीलिए आज मैंने इसका कुछ का कुछ उपाय निकालने की सोचने लगा कुछ देर बाद ख्याल आया की साला खुद को ही खत्म कर लिया जाये , ना ही मैं होऊंगा ना ये सब होगा इसलिए मैंने सुसाइड करने का मन बना लिया ।
जी हा सुसाइड
क्योंकि अब मुझे कुछ समझ नही आ रहा था।
सुसाइड से पहले जैसे अधिकतर लोग करते है ,मैं भी सुसाइड नोट लिखकर जाना चाहता था
इसीलिए नोट पैड ढूंढने लगा लेकिन हॉस्टल्स के इतिहास अनुसार ये कंबख्त कमरा भी उठना ही अव्यवस्थित है जितना पिक्चर्स और वेब सीरीज में दिखाया जाता है।
यहां कभी कोई चीज टाइम पर मिलती ही नही
कुछ देर ढूंढने के बाद मुझे मेरा वो नोट पैड मिल गया जो मैंने शुरुआत मे अपने शायरी और कहानियां लिखने के शोक को पूरा करने के लिए खरीदा था , शायद कभी सोचा भी नही था के इसी पर कभी सुसाइड नोट भी लिखुंगा।
नोट पैड मिलने के बाद मैंने उसपर अपने फैमिली वाले के नाम सॉरी लिखा और कुछ 2-4बाते लिखी , जैसा सभी करते है...
मैं अब बस यही सोच रहा था की सुसाइड का कौनसा तरीका इस्तमाल करू
सच में मारने के लिए भी इतना कुछ करना पड़ता है ये आज समझ आया
कभी सोचता कोटा से निकलने वाली चम्बल नदी मे जाकर कूद जाऊ
फिर ख्याल आता , नही यार वहा पर कई बार लोगो को बचा लिया जाता है और अगर मुझे बचा लिया तो मेरी तो लंका लग जायेगी पापा तोड़ेंगे अलग और समाज में बेज्जती होगी अलग
फिर सोचा जहर खा लेता हूं लेकिन ध्यान आया की साला आजकल तो कैमिस्ट बिना पर्चे के दबाई देते ही नही है
इसीलिए ये तरीका भी कैंसिल कर दिया
अब सोचा क्यों ना हाथ की नस काट लू
लेकिन ये थोड़ा फिल्मी लगा और वैसे भी ये इश्क़ मोहब्बत वाले लोग करते है, ऊपर से ये तरीका साला कुछ दर्द देने वाला भी था ।
और अपने को तो दर्द से बहुत डर लगता है इसिलए ये भी कैंसिल कर दिया ।
कितना मुश्किल होता है यार सुसाइड करने के तरीके सोचना , भगवान ने मशीनों की तरह इंसान में भी ऑन ऑफ का बटन क्यू नहीं लगाया ।
अब मैंने सोचा फाँसी लगाई जाये
हा ये तरीका सही था न ज़्यादा दर्द और न ही कोई खर्च सिर्फ 1 मिनट से भी कम टाइम मे खेल खत्म
अब मैं लटकने के लिए रस्सी ढूंढने लगा
अब ये रस्सी भी नही मिल रही थी
इसलिए कपड़े सूखाने वाली ही खोल लाया।
अब मैं तैयार था
रस्सी ऊपर बांधने ही वाला था कि.......
किसी ने मेरा दरवाजा खटखटाया
ये क्या यार साला तसल्ली से कोई मरने भी नही देता। अब कौन बचा था दिमाग की दही करने से जो आ टपका
कही साइड वाले रूम वाला वो बिहार का लड़का तो नही जो हर टेस्ट मे टॉप करता है एकदम किताबी कीड़ा है वो तो ।
अगर वो हुआ तो फिर ज्ञान देने लग जायेगा
मैं ये सब सोच ही रहा था की एक बार फिर किबाड़ खटखटाया
मैंने मरने का प्लान अधूरा छोड़कर दरवाजा खोला
सामने काम वाली बाई थी वो आज लेट हो गई थी।
जल्दी से रूम मे आई लेकिन मुझे और रूम के हाल देखकर कुछ देर सोचकर बोली क्या कर रहे हो भैया ????
मैं चुप रहा
वो फिर से बोली क्या कर रहे थे भैया जी
मैं फिर चुप रहा
वो तीसरी बार मे बोली "सुसाइड कर रहे हो"???
उसके कई बार पूछने पर मैंने बता दिया और रोने लगा ।
मेरी बात सुनकर उसने कहा " सुसाइड मत करो कुछ नही मिलेगा "।।
लोग कुछ दिन तुम्हे याद रखेंगे, तुम्हारे अपने कुछ दिन रोएंगे और फिर भूल जायेंगे । बस तुम्हारे माँ बाप ज़िन्दगी भर तुम्हे याद करके दुखी होंगे ।।
मेरे पति ने भी सुसाइड किया था 'कायर कही का'
मुझे और मेरे बच्चो को अकेला छोड़ गया इस दुनिया मे . क्या मैं उसके बिना मर गई ।
कुछ ऐसा करो जिससे लोग तुम्हे मरने के बाद भी याद करे । जो तुम कर सकते हो वो करो ""
बाई की इतनी बाते सुनकर मैं थोडा होश मे आया , कभी कभी वो लोग भी बड़ी बाते सीखा जाते है जिन्हें हम छोटा समझते है ,मुझे मेरी माँ का ख्याल आया जो शायद मुझे सबसे ज़्यादा प्यार करती थी और मेरी हर गलती को माफ़ कर देती थी
घर से चलते हुए माँ ने कहा था "बेटा जीवन मे कभी हार मत मानना मुसीबते आएँगी बस उनका डटकर सामना करना"
माँ की बात याद करके और बाई की बात सुनकर मैंने मरने का इरादा छोड़ दिया और बाई से ये बात किसी को ना बताने की कसम दी।।
फिर बाद मे सोचा की आज मैं क्या करने जा रहा था , एक छोटी सी असफलता के डर से अपनी ज़िन्दगी ही खत्म कर रहा था ,कुछ ना कुछ तो मैं भी अपनी लाइफ मे अच्छा कर ही सकता हूं ।
बस यही सोचते हुए मैंने अपनी लाइफ मे आने वाली खुशियों और दुःखो को सहन करने की प्रतिज्ञा ली और जीवन मे आगे वो काम करने की ठान ली जो मे अच्छे से कर सकता था।।
जिसको करने से मुझे ख़ुशी मिलती थी।
अब मैंने अपने शौक को अपना रोजगार बनाना चाहता था नई नई स्टोरीज के आईडिया मेरे दिमाग मे पहले भी घूमते रहते थे अब बस उन्हें कागज पर उतारना बाकि था । अब मुझे राइटर बनना था
मैं रोज रात को जागकर लिखता , दिन मे क्लास भी जाना होता था मैंने अभी ये सब घर पर नही बताया था, सोचा था जब कुछ बड़ा करूंगा तब बताऊंगा
मेरी एक महीने की मेहनत तैयार थी।
मात्र एक महीने में मैंने 10से ज्यादा छोटी कहानियां लिख दी और दो नॉवेल । अब बस ज़रूरत थी उनके छपने की जो की बिल्कुल भी आसान काम नहीं था लेकिन
जब आप कुछ सच्चे दिल से करना चाहते हो तो उसमे भगवान भी आपका साथ देता है
ऐसा मेरे साथ भी हुआ ।।
किसी भी नए राइटर के लिए पब्लिशर मिलना आसान काम नही होता और उसके लिए पैसे भी चाहिए होते है लेकिन इस बार किस्मत मेरे साथ थी मुझे पब्लिशर आसानी से मिल गया, मेरा एक कोटा का ही दोस्त था उसके अंकल एक अच्छी प्रकाशन कम्पनी मे थे।
मेरे दोस्त ने मेरी हेल्प की उसने मेरी नॉवेल की कहानियां उसके अंकल को भेज दी, उन्होंने मेरी स्टोरी पढ़ी और अगले दिन पब्लिकेशन में बात करके मुझे बताने को कहा।
अगले दिन अंकल का फ़ोन आया और कहा तुमसे पब्लिशर मिलना चाहता है
आज शाम इस पते पर आ जाना
मैं शाम को अंकल के दिए हुए पते पर पहुच गया
पब्लिशर से मीटिंग हुई और मेरी दो मे से एक नॉवेल पब्लिकेशन छापने को तैयार हो गए ।
जिसके लिए मुझे अपनी पॉकेट मनी से 7 हजार रुपए भी देने पड़े।
उधर इस दौड़ भाग मे मै पढाई से बिल्कुल अलग सा हो गया था
नीट का एग्जाम भी सर पर आ गया था ।
जिस दिन मेरा एडमिट कार्ड आना था उसी दिन मेरी नॉवेल की लॉन्चिंग डेट थी।
मैं उसी दिन पापा को सच बताना चाहता था लेकिन मन मे अभी भी एक डर था ।
मैंने इतना बड़ा कदम उठा लिए था और ये सुनकर पापा का रिएक्शन भी सामान्य नहीं होगा मुझे पता था । फिर भी मैंने हिम्मत करके पापा को कॉल किया मैं उन्हें सब सामने बैठकर बताना चाहता था शायद फोन पर उतने अच्छे से नहीं समझा पाता
इसलिए मैंने पापा को कोटा आने के लिए कहा बहुत मनाने के बाद वो कोटा आने के लिए तैयार हुए।
बुक लॉन्चिंग डेट से दो दिन पहले पापा मेरे पास आ गए ।
मैंने अगले दिन मैंने उन्हें सब सच बता दिया
"पापा मेरा मन नही करता डॉक्टर बनने को , मुझे नही लगता की इसे करके कभी मैं खुश हो पाउँगा मैं इसमें खुद को दबा हुए महसूस करता हूं ,
मैं राइटर बनना चाहता हु ,दो दिन बाद मेरी नॉवेल की लॉन्चिंग डेट है ।।" ये सब मैंने एक सांस में रुंधे गले से बोल दिया।
इतना सुनकर पापा एकदम से गुस्सा हो गए और बोले " क्या यही सब करने के लिए हमने तुम्हे इतने बढ़या कोचिंग मे पढ़ाया, आजकल के बच्चे मां बाप को कुछ समझते ही नहीं है क्या हमारे सपने बेकार थे और तो और सोसाइटी के लोग क्या कहेंगे "।।
"पापा हम आपके सपनो की कदर करते है इसलिए तो 2 साल से उस काम को करने की कोशिश मे लगे है जो हम नही कर सकते या जो हमे बिलकुल भी अच्छा नही लगता ।
पापा हमे जन्म आपने दिया है सोसाइटी के लोगो ने नही । हमने तो आपने आपको खत्म करने की भी सोच ली थी लेकिन नही कर पाये ।। अगर हम मर जाते तो सोसाइटी के लोगो का कुछ नहीं जाता , जाता तो बस आप का बेटा।।
ये सब सुनकर पापा चुप हो गए और सारा दिन हमसे बात तक नही की ।
शाम को बोले "कहा है तुम्हारी नॉवेल की लॉन्चिंग। हमे भी ले चलोगे क्या साथ।।
पापा के मुंह से ये सुनकर मैंने उन्हें गले लगा लिया और मेरी आँखों मे ख़ुशी से आँसू आ गए , क्यों नही पापा आप भी चलेंगे और लॉन्च भी आप ही करोगे
पापा का सपना टूटने का अंदर से दुःख मुझे भी था लेकिन ख़ुशी इस बात की थी की मैं वो करने जा रहा था जिसमें में खुद को जिंदा महसूस करता था ।।
अगले दिन हम दोनों तैयार होकर पब्लिकेशन ऑफिस होते हुए सिटी मॉल पहुच गए जहा लॉचिंग फंक्शन था ।
मॉल के ग्राउंड फ्लोर के सेंटर मे स्टेज था जहा मैं ,पापा ,अंकल और एक पब्लिकेशन वाला आदमी बैठे थे।
भीड़ भी बहुत थी । बहुत सारे कोचिंग के स्टूडेंट्स भी थे जिनमे से कुछ मुझे जानते भी थे ।
कुछ देर बाद लॉन्चिंग प्रोग्राम स्टार्ट हुआ
पापा के हाथो मैंने नॉवेल लॉन्च कराया
उनके चेहरे पर आज एक ख़ुशी थी जो देखकर मैं भी बहुत खुश था
अगले दिन अख़बार मे मेरे और पापा के फोटो के साथ न्यूज छपी ,
"कोचिंग छात्र ने लिखा नॉवेल"
किसी दूसरे अखबार ने लिखा , " कोटा में सबके सपने पूरे होते है बस ज़िद्द होनी चाहिए"
ये सब देखकर मैं बहुत खुश था अब मुझे 3 दिन बाद मैं पापा के साथ अपना सामान लेकर वापस कानपुर जाना था
कुछ दिन बाद मेरा एग्जाम हुआ
रिजल्ट आया एमबीबीस तो नही लेकिन बीडीएस में एडमिशन लायक नंबर आये थे
पापा ने एडमिशन लेने को मना कर दिया
बोले " बेटा अब तुम लिखो । एक ही काम करो , पूरी सिद्दत और ईमानदारी के साथ करो ,डॉक्टर हम छोटे को बना लेंगे :) "
पापा की बात सुनकर मैं उस दिन के बाद पूरी तरह राइटिंग में रम गया और पास ही के कॉलेज से हिंदी साहित्य में बीए में एडमिशन भी ले लिया ।
कुछ दिनों बाद मेरी मेहनत और लगन के कारण मेरी दूसरी नॉवेल भी पब्लिश होने वाली होने वाली है।
आज मैं अपनी लाइफ से खुश हु मेरी पहली नॉवेल की रॉयल्टी से पैसे आते है।
घर और गाड़ी भले ही छोटे होंगे लेकिन मैंने वो काम अपने लिए चुना जिसको करते हुए मैं कभी थकूँगा नही , जिससे मैं कभी बोर नहीं होऊंगा
शाम को सुकून से अपने परिवार के साथ बैठा करूंगा ।
बस इतनी सी थी मेरी कहानी ।।।
"""ये पूरी कहानी काल्पनिक है" दोस्तो कभी कभी हम छोटी छोटी असफलताओ से या उनके डर से कुछ ऐसा करने की सोच लेते है जो हमारे और हमारे अपनों के लिए बिल्कुल भी सही नहीं होता।
हम एक बार भी नही सोचते की जिन्होंने हमे ज़िन्दगी दी और पाल पोष कर इतना बड़ा किया उनपर क्या बीतेगी ।। माँ बाप को आपकी असफलता का इतना दुःख नही होता जितना हार मान लेने और मुसीबतो से ना लड़ने से होता है ।।
दोस्तो लाइफ इतनी आसान नहीं है , वो हर कदम पर हमारी परीक्षा लेती है और हमे भी जरूरी नहीं है हर बार टॉप ही किया जाए कुछ परीक्षाएं बस पास होना भी काफी होता है , बस उनसे डरकर उन्हें छोड़ना नहीं।
अगर कहानी पसंद आई तो कॉमेंट और शेयर करे 🙏
""""""" THE END""""""

So touching👌🏻👌🏻
जवाब देंहटाएंBadiya
जवाब देंहटाएंShukriya
हटाएं❣️❣️
जवाब देंहटाएंThnx vishu
हटाएं🌺
जवाब देंहटाएं❣️
हटाएंWow.. aashu...❤️❤️❤️ Adorable
जवाब देंहटाएंThnxx a lot ❣️❣️
हटाएं👍
जवाब देंहटाएं❣️
हटाएंVery motivating
जवाब देंहटाएंThnxx
हटाएंKash ye story real hoti i loved this story❣️❣️
जवाब देंहटाएंThnxx .it may be real somewhere ❣️
हटाएंheart touching😍😍
जवाब देंहटाएंThnx a lot ❣️
हटाएंWow ashu 👌👌
जवाब देंहटाएंThnqq ♥️
हटाएं