Ghar Ka Mukhiya |Social inspirational story |

Social strory , Ghar ka mukhiya , family issues
आज रजत के घर में खुशी का माहौल था , आज उसका लगन होने वाला है । दहेज में कार , घर का सारा सामान और नगदी भी मिल रही है । 

रजत चौधरी और रमन चौधरी , किशन सिंह चौधरी के दो बेटे । किशन चौधरी गांव के इज्जतदार और भले लोगो में से एक है जिनकी गांव के पास ही 50 बिघा जमीन आती है ।
शायद उसी के प्रभाव और किशन सिंह के बर्ताव कि वजह से ही आज रजत के सिर्फ बारहवी पास होने के बावजूद भी इतनी अच्छी शादी हो रही है ।

रजत का बचपन से ही पढ़ाई में बिल्कुल मन नहीं था गांव के लडको के साथ सारा दिन मस्ती करना और बाइक पर घूमना ही उसके काम थे वहीं उसका छोटा भाई रमन पढ़ाई में होशियार और कुछ बनना चाहता था ।

रजत की लापरवाही और गैर जिम्मेदारी से तंग आकर किशन सिंह ने उसकी शादी का फैसला लिया था कि शायद गृहस्थी की जिम्मेदारी आने पर वो सभल जाए । गांवो में ऐसा अक्सर देखा जाता है कि बच्चो के ऐसे निकलने पर उनकी जल्दी शादी कर दी जाती है। आज खुशी खुशी रजत का लगन हुआ और  ग्यारह दिन बाद शादी तय हुई । 

ग्यारह दिन बाद रजत की शादी हुई । लड़के और लड़की दोनों पक्ष ने बड़ी खुशी और धूमधाम से शादी की तैयारियां की थी। लड़की पक्ष द्वारा  बारात में गए हर एक व्यक्ति को एक चांदी का सिक्का उपहार रूप दिया गया। 

शादी के बाद दुल्हन किरन अपने नए घर रहने लगी थी , किरन घर के काम में निपुण और पढ़ी लिखी थी । ससुराल में वो सास मंजू देवी की रसोई और घर के कामों में खूब सहायता करती । 
वैसे तो किशन सिंह के घर में किसी चीज की कमी नहीं थी लेकिन किरन को उसके पति रजत का यू सारा दिन घर पर बेरोजगार पड़े रहना पसंद नहीं था , रजत अपनी खेती के सिवा कोई काम नहीं करता था जिससे उसे आय हो । 
चुकी अभी तक किरन को किसी चीज की तंगी नहीं थी इसलिए वो कभी रजत को इस बारे में टोकती भी नहीं थी । 

हर साल किशन सिंह के खेतों में खूब अच्छी फसल होती थी लेकिन इस बार मौसम की मार और रजत की शादी में हुई व्यस्तता के कारण , फसल की और ध्यान न जाने के कारण फसल कुछ अच्छी नहीं उगी थी और रही बची कसर कई दिन से लगातार हो रही बारिश ने पूरी करदी जिससे सारी फसल बर्बाद हो गई । इस बार किशन को बिल्कुल भी आय नहीं हुई जिस वजह से परिवार का खर्च और अगली फसल उगाने के लिए किशन सिंह को शहर के सेठ से 2 लाख रुपए कर्ज लेना पड़ा क्योंकि घर की जमा पूंजी तो रजत की शादी में खर्च हो चुकी थी बस फसल ही एक उम्मीद थी ।

किशन सिंह ने हिम्मत ना हारते हुए कुछ दिन बाद अगली फसल बोने की सोच ली थी लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था ।
         अचानक से किशन सिंह की तबियत खराब रहने लगी ,सेठ से लिया 2 लाख कब घर के खर्च और उसकी दवाई में उठ गया पत ही नहीं चला । अब आस पास के डॉक्टर भी जवाब दे चुके थे डॉक्टरों का कहना था कि अब उसे शहर के बड़े अस्पताल में दिखाया जाए । 

घर पर पैसा न होने के कारण और खुद चल फिर न पाने के कारण किशन ने सेठ से ओर कर्ज देने की फोन पर विनती की अगले ही दिन सेठ अपने मुंशी को लेकर किशन के घर आ गया । 
किशन ने 4 लाख ओर उधारी मांगी इस बार रकम ज्यदा और हालात ठीक ना होने के कारण सेठ ने पैसे के बदले कुछ गिरवी रखने की शर्त रखी ।
किशन के पास जमीन के आलावा ऐसा कुछ नहीं था जिसे वो गिरवी रख सके उसने दिल पर पत्थर रख अपनी 5 बीघा जमीन गिरवी रख कर्ज ले लिया

पैसा आने पर किशन का इलाज शहर के बड़े अस्पताल में शुरू हुआ वहा की मंहगी जांच और डॉक्टरों से पता चला कि उसे पेट का कैंसर है ।
जिसका इलाज बहुत मंहगा और मुंबई के और बड़े अस्पताल में होगा । 
सेठ से लिया 4 लाख भी यहां की जांचो और दबाई में खर्च हो चला था ।
अब मुंबई के बड़े अस्पताल में इलाज के लिए फिर से पैसे का प्रबंध करना था ।

इस बार और ज्यादा पैसा चाहिए था इसलिए सेठ ने भी कर्ज देने से मना कर दिया और हारकर किशन सिंह को अपनी जमीन का एक हिस्सा बेचना पड़ा । 
मुंबई के अस्पताल का खर्च , मंहगी दबाई और कीमोथेरेपी कब धीरे धीरे उसकी 40 बीघा जमीन खा गया पता ही नहीं चला ।
कुछ दिन कैंसर से लड़ते लड़ते किशन सिंह की मौत हो गई । उसके परिवार पर मानो जैसे दुखो का पहाड़ टूट पड़ा था , जमीन भी जा चुकी थी और किशन को बचाया भी नहीं जा सका था । 

किशन की मौत के बाद परिवार टूट चुका था अब अक्सर घर में तंगी का माहौल रहता और छोटी छोटी बातों पर कभी रजत और उसकी बीबी किरन तो कभी उसकी मां मंजू और बीबी किरन में झगड़े होने लगे ।
Husband wife fight , family issues


शेष बची 10 बीघा जमीन में घर चलाना और सेठ का 6 लाख कर्ज चुकाना मुश्किल होता जा रहा था। घर की तंगी और सास के तानों से परेशान आकर रजत की बीबी किरन अपने मायके चली गई 
Family fight , family issues

रजत की मां मंजू देवी अक्सर उसको ताने दिया करती थी के वो मनहूस है जिस दिन से घर में आई है घर का नाश हो गया ।

घर के इन सब बुरे हालातो के बीच रजत का छोटा भाई रमन बीए कर चुका था अब वो आईएएस बनना चाहता था जिसके लिए वो दिल्ली चला गया , उसने घर के बुरे हालात देखे थे इसलिए वो अपना पढ़ाई और बाकी खर्च चलाने के लिए दिल्ली में पड़ोस के बच्चो को ट्यूशन पढ़ाने लगा था। 

बीबी के मायके जाने और कर्ज में डूबे होने के बाद अब रजत बहुत परेशान रहने लगा था । 
एक बार वो अपनी बीबी को वापस लेने भी गया लेकिन ससुराल वालो ने वापस नहीं भेजा उल्टा धमाका दिया के कमाना शुरू नहीं किया तो हमारी बेटी को तलाक देने के लिए तैयार रहना हम अपनी बेटी की शादी कहीं और कर देंगे ।
लेकिन रजत के पास तो ना कोई हुनर था और ना ही इतनी पढ़ाई की थी के कहीं अच्छी नोकरी मिल पाती । 

कुछ दिन पैसा ना मिलने पर सेठ ने भी गिरवी रखी जमीन कब्जा लेने की धमकी देना शुरू कर दिया और आखिर में कब्जा ली । 

अब रजत पूरी तरह टूट चुका था कुछ बचता न  देख उसने छोटी मोटी मेहनत मजदूरी ही शुरू कर दी , एक समय हो रजत बाइक पर घुमा करता था आज उसे मजदूरी करते देख गांव वाले उसका मजाक बनाते थे  लेकिन उसपर उनकी बातो का कम ही असर पड़ता था , कुछ समय बाद वो अपनी बीबी को भी मना कर मायके से लेे आया और कुछ समय बाद उसकी बीबी गर्भवती हो गई परिवार में खुशियां शायद फिर से आना चाहती थी।

लेकिन बाप के घर ऐश ओ आराम में पली बढ़ी उसकी बीबी का उसकी मेहनत मजदूरी की कमाई में गुज़रा नहीं हो पा रहा था इसलिए परिवार में फिर झंडे शुरू हो गए ।

रोज रोज की पारिवारिक कलह से तंग आकर रजत अब शाम को शराब पीने लगा था इस वजह से झगड़े और बढ़ने लगे । एक दिन ऐसे ही रात को हुए झगड़े में रजत ने अपनी बीबी पर हाथ उठा दिया , अगले दिन उसकी बीबी फिर मायके चली गई । इस बार मायके जाकर उसने पुलिस केस भी कर दिया जो तलाक तक पहुंच गया ।

उधर रजत का भाई रमन पूरी मेहनत से अपनी सिविल सर्विस की परीक्षा की तैयारी में लगा था वो कभी कभी घर के हालातो के बारे में सोचकर परेशान तो होता लेकिन हिम्मत नहीं हारता, उसे पता था कि वो मेहनत करके ही उन्हें बदल सकता था ।
रमन की मेहनत रंग लाई और वो अपने पहले ही प्रयास में आईएएस के लिए चयनित हो गया 
और एक जिले का जिलाधिकारी बन गया ।

कुछ दिनों बाद ही उसने अपने भाई रजत को भी एक बिजनेस करवा दिया । अब रजत भी अच्छा कमाने लगा था । रजत का तलाक केस कोर्ट में चल रहा था , वो अपने बुरे वक़्त में साथ न देने वाली बीबी को तलाक देना चाहता था लेकिन उसके पेट में पल रहे अपने बच्चे और अपनी ही कुछ गलतियों से मजबूर होकर  उसने ससुराल वालो के साथ आपसी सुलह करली  , इस बार उसकी बीबी ने भी सारी सुविधाएं और पति को बदला देख खुद को बदल लिया तथा दोनों सुखी सुखी रहने लगे । 

      """बस इतनी सी थी ये कहानी"""""


दोस्तो इस कहानी का सार ये है कि बहुत सारी समस्याओं की जड़ आभाव होता है ऐसा हम अपने आस पास भी देखते है । हमे समय रहते अपनी जिम्मेदारियां समझ लेनी चाहिए , और जबतक हम ज़िम्मेदार ना हो जाए तब तक और जिम्मेदारियां नहीं बढ़ानी चाहिए , काश अगर समय रहते ही रजत ने अपनी ज़िम्मेदारी समझ ली होती ओर जल्दी शादी न की होती और सिर्फ मा बाप के भरोसे ना रहकर कुछ बन गया होता तो उसे इतनी कठिनाइयों का सामना ना करना पड़ा होता

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