Best Independence Day Shayri 2022

 Independence Day Poem


वो इश्क़ अलग था भगतसिंह का इस मिट्टी से 

जो हंसते हंसते जां भी इसपर वार गए 


वो इश्क़ अलग था आजाद का अभिमान से 

जो लड़ते लड़ते खुद को गोली मार गए 


वो इश्क़ अलग था बिस्मिल का क्रांति से 

जो बिन मजहब सोचे , कर उद्धार गए


कैसे भूलू उन सब रखवालों को 

जो आज़ादी कर , हमपर उधार गए.....




आओ बच्चो तुम भी सुनो
कैसे मां भारती आजादी का श्रृंगार करी
सूनी थी जो बरसों से
वीरों ने अपने लहू से वो मांग भरी

मंगल पांडे ने अलख जगाई
बिस्मिल , राजगुरु ने ललकार करी
भगत सिंह ने इंकलाब पढ़ाया
मिलकर तब भारत ने हुंकार भरी

आजाद ने खुद को ही गोली मारी
आजादी खुद की ना अंग्रेजो के नाम करी
लाला जी ने लाठी खाई
स्वाभिमानी पगड़ी फिर भी ना तार धरी

गांधी जी ने चरखा चला , स्वदेशी स्वाभिमान सिखाया
अंग्रेजी चीजे तब हमने बहिष्कार करी
सुभासचद्र बोस ने एक फौज बनाई
जिसमे मिलकर हर एक नर और नार लड़ी

देख हौसला भारत के वीरों का , अंग्रेजो के छक्के छूटे
तब जाकर उन्होंने अपनी संगीनें और तलवार धरी

आओ बच्चो तुम भी सुनो
कैसे मां भारती आजादी का श्रृंगार करी
सूनी थी जो बरसों से
वीरों ने अपने लहू से वो मांग भरी 

Independence day poems , independence day Poetry




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