Sangharsh | Social Inspirational Story |

        संघर्ष - एक औरत की कहानी 

Women struggle , women empowerment , Sangharsh

दोस्तो ये कहानी है सुधा शर्मा की । 
सुधा शर्मा , ज्ञान शर्मा और गायत्री शर्मा की 3 बेटों में इकलौती बेटी है , ये परिवार पहले राजस्थान के कोटा जिले के पास एक गांव में रहता था लेकिन समय के साथ बदलते हालात ओर रोजगार के वजह से वर्षों पहले कोटा शहर में आकर बस गया था ।
सुधा शर्मा एक 35 साल की महिला है जो कोटा शहर के हजारों टिफिन मेस में से एक मेस चलाती है । 

जब मैं घर से हजारों किलोमीटर दूर पहली बार कोटा जैसे अनजान शहर गया था तब कोचिंग में एडमिशन के बाद शुरू होने वाली अच्छे जगह रहने और खाने की मेरी तलाश सुधा शर्मा पर ही खत्म हुई थी जिन्हें बाद में हम सुधा दीदी बुलाने लगे थे।

सुधा दी भी कोचिंग के बाहर खड़े सैकड़ों अंकल आंटियो में से एक थी जो कोचिंग में एडमिशन के बाद बच्चो को रूम्स ओर मेस दिलाते थे या उनके खुद के रूम्स ओर मेस होते थे। सुधा दी के पास सिर्फ 4 रूम्स का कॉन्ट्रैक्ट था जो उनके घर के सामने  एक अग्रवाल अंकल के थे,  सुधा दी अपने घर में ही एक छोटा सा मेस चलाती थी ।

मैं ओर मेरा दोस्त रोहन उनके घर के सामने वाले अग्रवाल अंकल के रूम में ही रहते थे बस खाना खाने दोपहर और रात को उनके यहां जाते थे ।

मुझे कोटा आए हुए अभी 15 ही दिन हुए थे लेकिन सुधा दी और उनके परिवार से मैं अच्छी तरह घुल मिल गया था । उनका लगभग 20 साल का एक बेटा लक्ष्य और 18 साल की बेटी मधु थी।
ये घर जिसमें वो मेस चलाती है वो उनके पिता का ही है जो उनकी मां के साथ सुधा दी के पास ही रहते है और उनके बेटे कोटा में ही अपने अपने घरों में अलग रहते है । 

सुधा दी का बेटा लक्ष्य एक पैर से विकलांग है सुना है उसे बचपन में पोलियो हो गया था लेकिन लड़का मेहनती है पढ़ाई में भी अच्छा है , कोटा इंजीनियरिंग कॉलेज  से ही बी.टेक फाइनल ईयर में है , उसकी बहन मधु अभी 12वी में है । 

मुझे अब कोटा आए लगभग 2 महीने हो गए थे लेकिन सुधा दी के पति मुझे एक बार भी दिखाई नहीं दिए थे , मैंने कई बार उनके घर में टंगी तस्वीरों से भी अंदाजा लगाने की कोशिश की लेकिन कुछ समझ नहीं पाया , कई बार दी से पूछने का मन भी हुआ लेकिन ये सोचकर नहीं पूछा की मैं तो यहां पढ़ने आया हूं मुझे क्या और वैसे भी किसी की पर्सनल लाइफ के बारे में जानकर क्या ही करना ।  

एक दिन मैं और मेरा दोस्त रोहन कोचिंग के लिए जा रहे थे तभी रास्ते पर भीड़ देखकर रुके और जाकर देखा तो सामने लक्ष्य घायल पड़ा था , लक्ष्य का कॉलेज से आते हुए किसी बाइक से ऐक्सिडेंट हो गया था उसके सिर ओर पैर में ज़्यादा चोट लगी थी । 
मैं भीड़ को हटा लक्ष्य के पास गया और उसके सिर पर अपना रुमाल रख अपने दोस्त रोहन को सुधा दी को फोन करने को कहा और बोला कि वो सीधा कोटा मेडिकल कॉलेज पहुंचे हम उसे वहीं लेकर जा रहे है , लक्ष्य का खून अपने रुमाल से रोक मैंने एक ऑटो रुकाया ओर जल्दी से कुछ लोगो को मदद से उसे ऑटो में बैठा , कोटा मेडिकल कॉलेज पहुंच गया । वहा पहुंचते ही इमरजेंसी में डॉक्टर को बुलाकर लक्ष्य को एडमिट करवा उसका इलाज शुरू करवा दिया , कुछ देर बाद ही सुधा दी भी अपने पिता जी के साथ हॉस्पिटल पहुंच गई , सुधा दी रो रही थी मैंने उनको शांत कराया की डरने की कोई बात नहीं है लक्ष्य ठीक है डॉक्टर ने निश्चिंत रहने को रहा है फिक्र करने की कोई बात नहीं है । 

कुछ देर बाद डॉक्टर इमरजेंसी रूम से बाहर आया और बोले कि अब वो ठीक है हमने सिर में टांके भर दिए है लेकिन काफी खून बहने की वजह से उसको खून चड़ना होगा तो आप जल्दी से AB- खून का इंतेजाम कर लिजिए वरना ब्लड बैंक से खरीद के चड़वा दीजिए । 

डॉक्टर की बात सुनकर सुधा दी ने अपने भाइयों को खून का इंतजाम करने के लिए फोन किया लेकिन थोड़ी ही देर बाद उनके जवाब आ गए की खून नहीं मिल पा रहा है वैसे भी  AB- ग्रुप बहुत रेयर होता है । मैं सुधा दी को  परेशान होते देख ही रहा था तभी मुझे याद आया कि मेरे दोस्त दोस्त का भी ब्लड ग्रुप AB- ही है . मैंने रोहन को एक साइड ले जा उससे बात की । 

रोहन पहले तो बोला कि यार ब्लड बैंक से खरीद लेंगे ना , एक तो यहां मेस का खाना खाकर खून बनता ही कहा है ऊपर से तू डोनेट करने के लिए बोल रहा है । 
बात तो उसकी सही थी लेकिन सुधा दी कि परेशानी ओर हालात देख मुझे भी पता था कि पहले ही दवाइयों पर बहुत खर्च होने वाला था और खून खरीदने में पैसे खर्च नहीं करवा सकते थे । 
मैंने किसी तरह रोहन को मनाया ओर वो खून देने के लिए तैयार हो गया । लक्ष्य को खून चड़ाया गया , डॉक्टर ने 2 दिन बाद डिस्चार्ज करने को बोला । 

अब शाम हो चुकी थी आज की हमारी क्लास भी मिस हो गई थी कुछ देर बाद में सुधा दी के पास गया उनको समझाया कि आप चिंता मत करना , आप लोग लक्ष्य के पास रुको हम लोग घर जा रहे है कल फिर आप लोगो के लिए खाना लेकर आ जाएंगे , मेरी बात सुनकर सुधा दी अचानक से इमोशनल हो गई और मुझे गले लगा लिया ओर बोली थैंक्यू बेटा , जहा मेरे अपने भाइयों ने साथ नहीं दिया वहा तुम सुबह से भूखे प्यासे मेरे साथ खड़े रहे ओर तो ओर खून तक दिया । 

मैंने उनको संभालते हुए कहा के दीदी लक्ष्य भी हमारे भाई जैसा है ये तो हमारा फ़र्ज़ था । 
तब सुधा दी बोली कि अब तुम लोग जाओ मधु या  मां से खाना बनवा लेना आज ।
हम वापस आ गए , पहुंचकर पहले मधु ओर उसकी नानी को लक्ष्य का हाल बताया , उनको समझाया की वो ठीक है परसो आ जायेगा , शाम को अपने लिए खाना बना कर खा लेना हम लोग बाहर खा आएंगे । ये बोलकर हम अपने रूम पर आ गए । 

आज सारा दिन भागदौड़ में मैं ओर रोहन रोज की कोचिंग से भी ज्यादा थक चुके थे , अब रात के 8 बज चुके थे भूख लगने लगी , मैं रोहन को साथ लेकर बाहर खाना खाने आ गया । रोहन को नॉनवेज बहुत पसंद है मैंने उससे कहा के चल आज नॉनवेज खाते है , वो तपाक से बोला हां यार आज तो खून भी दिया है कमजोरी सी लग रही है चल चिकन खाते है आज । 

हम नॉनवेज खाना डिसाइड कर कोटा के सबसे फेमस नॉनवेज रेस्टोरेंट फ़िरदौस चले गए जहां रोहन ने जमकर चिकन खाया लेकिन मैं बस थोड़ा ही खा पाया क्योंकि मेरे दिमाग में अभी भी आज सारे दिन की बाते घूम रही थी कि मुसीबत के समय में कैसे अपने भी साथ छोड़ देते है, सुधा दी कैसे परेशान हो रही थी , सोचते सोचते मुझे एक बार फिर याद आया कि सुधा दी ने एक बार भी अपने पति को क्यों फोन नहीं किया , यही सब सोचते सोचते हमने अपना डिनर खत्म किया और वापस रूम पर आने लगे ।

रूम पर वापस आते वक़्त ऑटो में ही मेरा फोन बजा , पापा का फोन था । मैंने फोन उठाया , हाल चाल पूछने के बाद पापा ने पूछा के आज क्लास क्यों नहीं गए थे , ये सुनकर मैं चौंक गया के इन्हे कैसे पता चल गया तभी याद आया कि ये सब काम कोचिंग से एबसेंट होने पर जाने वाले मैसेज ने किया होगा । मैंने पापा को आज की सारी घटना डिटेल में बता दी , सुनकर पापा खुश हुए और बोले , "आई एम् प्राउड ऑफ यू बेटा " . कोई बात नहीं आज का पढ़ाया हुए डाउट क्लास में कर लेना  ,  मैं कुछ पैसे तुम्हारे अकाउंट में ट्रांसफर कर रहा हूं वो सुधा दी को एडवांस में दे देना उनको ज़रूरत होगी । पापा से बात करते करते हम रूम पर पहुंच गए और थके होने के कारण जल्दी है सो गए ।

अगली सुबह मेरी आंख 8 बजे खुली लेकिन रोहन अभी तक सो ही रहा था , मैंने उसको उठाने की कोशिश की लेकिन वो नींद में ही बोला कि साले कल ही एक यूनिट खून दिलवाया है मेरा , आज तो क्लास से पहले तक सोने दे , उसकी बात सुनकर मुझे हसी आईं और मैंने उसे सोने दिया , हमारी क्लास वैसे भी दोपहर से होती थी तो आराम से 1 बजे तक का टाइम था हमारे पास । मैंने अपनी छत से ही सामने सुधा दी कि बेटी मधु को बोल दिया कि वो उनके लिए नाश्ता बना दे मैं थोड़ी देर में लेकर जाऊंगा । 
9 बजे तक नह धो कर मैं नाश्ता और एटीएम से पापा के भेजे हुए 10 हजार रुपए लेकर हॉस्पिटल पहुंच गया । 

सुधा दी मेडिकल पर दवाइयों की लाइन में परेशान सी खड़ी थी , मैंने पास जाकर पूछा तो बोली के रात लक्ष्य की तबीयत बिगड़ी थी , डॉक्टर ने ये ओर दवाई लिखी है और मैं जो पैसे घर से लाई थी वो लगभग कल की दवाइयों में खर्च हो चुके है।
कई रिस्तेदारो को कॉल भी कर चुकी हूं कोई देने को तैयार नहीं । सुधा दी कि बात सुनकर मैंने उनको चिंता ना करने को कहा और 10 हजार रुपए निकाल कर उनके हाथ पर रख दिए और बोला पापा ने भेजे है आपको देने के लिए । पैसे देख सुधा दी कि आंखो में आंसू आ गए और बोली बेटा तू मेरे लिए फरिश्ता बनता जा रहा है ओर उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर चूमते हुए थैंक्यू बोला । सुधा दी को खुश देख मेरे चेहरे पर भी एक सुकून वाली मुस्कान आ गई और मन ही मन पापा को याद करने लगा । 

मेडिकल से दवाइयां ले हम लक्ष्य के पास गए वो नाश्ता कर रहा था , हॉस्पिटल की तरफ से दलिया मिला था , उसके नाना जी पास ही खड़े थे । 
मैंने उसके पास जाकर उसका हाल चाल पूछा , उसने मुस्कुराते हुए बोला बस भाई तेरी मदद से जिंदा हूं ।
नहीं भाई ये सब मेरा फ़र्ज़ था बोलकर मैंने घर से लाया नाश्ते का टिफिन सुधा दी को पकड़ा दिया ।

टिफिन ले सुधा दी ने घर के बारे में पूछा , मैंने बता दिया के मधु ओर नानी ठीक है मैंने उन दोनों  को समझा दिया था ।

कुछ देर वहा रुकर में दीदी को बोलकर वापस आ गया । वापस आकर देखा तो 12 बज चुके थे और मेरा दोस्त रोहन भी जाग कर क्लास के लिए तैयार हो चुका था । 
मुझे वापस देखते ही बोला , " प्रभु समाज सेवा हो गई हो तो लंच करके क्लास चले " उसको हां बोलकर मैं ड्रेस पहन तैयार हुआ , दूसरे मेस पर लंच किया ओर क्लास को निकाल पड़े ।

लक्ष्य 8 दिन हॉस्पिटल में रहा मेरा रोज का शेड्यूल था के में सुधा दी को नाश्ता पहुंचा कर आता था ।
आज 8दिन बाद लक्ष्य डिस्चार्ज होकर वापस आ  रहा था , मैं , सुधा दी और उसके नाना जी उस घर ले आए थे । कुछ दिन बाद लक्ष्य पूरी तरह ठीक हो गया । 

लक्ष्य वाली घटना के बाद मेरा और सुधा दी के परिवार का एक अलग ही संबंध बन गया था , अब में उन लोगो से पहले से ज्यादा खुलकर बाते करता था सुधा दी भी मुझे बेटे जैसा ही मानती थी और उनकी बेटी मधु भी मुझे अब भैया बुलाने लगी थी।

कुछ दिन बाद ही रक्षाबंधन का त्यौहार आया । मेरा घर से बाहर ये पहला रक्षाबंधन था । सुधा दी ने आज सुबह को ही मुझे तैयार होकर घर आने को कहा । मैं ऐसे ही हल्का फुल्का नाह धो तैयार होकर उनके घर चला गया , मैंने जाकर देखा कि एक उन लोगो ने राखी की तैयारी कर रखी थी , सामने मधु आरती वाला थाल लिए खड़ी थी । मैं अन्दर गया तो रसोई से अच्छे अच्छे खाने कि खुशबू मेरे मन को खुश करती चली गई । 
सुधा दी ने मुझे कमरे में बुलाया और लक्ष्य के साइड में ही एक सोफे पर बैठा लिया और मधु को कहा  कि चल अब अपने दोनो भाईयो को राखी बांध दे , मधु ने पहले मेरे राखी बांधी ओर बोली आज इसी भाई की वजह से दूसरा जिंदा है इसलिए इसी से शुरु करती हूं । मैंने राखी बंधवा ली लेकिन जब मेरा हाथ पॉकेट पर गया तो याद आया के मैं अपना पर्स रूम पर ही भूल आया हूं । मैंने मधु को प्रोमिस किया के शाम को तुझे तेरा गिफ्ट मिल जाएगा । मधु ने कहा ," आप पहले ही इतना अच्छा गिफ्ट दे चुके हो मुझे ओर कोई गिफ्ट नहीं चाहिए । 

आज में सुबह थोड़ा उदास था लेकिन अब बहुत खुश था , मझे घर से दूर एक बहन ,भाई और मां जैसी महिला मिली गई थी। 

उन लोगो से ऐसे ही बात करते करते टाइम बीत रहा था तभी मेरे दिमाग में एक ख्याल आया कि क्यों ना आज सुधा दी से उनके पति के बारे में पूछ लूं , मैंने हिम्मत करके सुधा दी को बोला , " दी आपको बुरा ना लगे तो एक बात पूछूं" ?

सुधा दी ने मुस्कुराते हुए कहा, बेटे की बात का क्या बुरा लगना पूछले ।

मैंने पूछा ," दी लक्ष्य के पापा कहा है "? 

मेरा सवाल सुन सुधा दी एकदम से चुप हो गई फिर थोड़ी देर बाद बोली , है इसके पापा , जिंदा है उदयपुर में बस चलाते है लेकिन हम उनसे मिलते जुलते नहीं है । 

सुधा दी कि बात सुन मेरी उत्सुकता और बढ़ी तो मैंने पूछा क्यों क्या हुआ था ?

सुधा दी बोली , चल तुझे शुरू से बताती हूं । 

"मेरी शादी जब मैं 15 साल की थी तब ही करदी गई थी जो उस टाइम राजस्थान में आम बात थी , लेकिन मेरे पति की उम्र 25-30 साल थी जो आम बात नहीं थी । 
Child marriage , baal vivaah

उस टाइम पापा को पैरालिसिस हुए था तो भाईयो ओर रिश्तेदारों ने जल्दबाजी में बिना कुछ सोचे मेरी शादी करदी थी। शादी के 2-4सालों में ही लक्ष्य ओर मधु हो गए । मेरा पति रोज दारू पीकर आता ओर मुझे मारता , एक दिन में तंग आंकर अपने दोनो बच्चो को लेकर पापा के पास भाग आई ,उन 2-3साल में पापा कुछ ठीक हो चुके थे मैंने उन्हें अपना निर्णय बता दिया था के अब मैं कभी वापस नहीं जाऊंगी । पहले हम लोग भी भाईयो के साथ रहते थे लेकिन  उनकी बिबियो के रोज रोज के ताने और भाईयो की दुत्कार से परेशान होकर, हम लोग भाईयो से अलग इस घर में रहने लगे , तब से आज तक सब मैंने ही सब संभाला है । "

सुधा दी कि कहानी सुन में स्तब्ध रह गया , एक छोटी सी उम्र में इस महिला ने कितनी कठिनाइयों का सामना किया है खुद पढ़े लिखे ना भी होने पर अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दी है । सारी जिम्मेदारियां अकेले उठाई है ।

मुझे ख्यालों में खोया देख सुधा दी ने कहा , तू कहा खो गया चल वापस आ कहानी अभी और भी है वो कभी फिर सुनाऊंगी , वो हिस्सा इतना बोरिंग ओर शेंटी नहीं है । 

मैंने कहा ठीक है दीदी अब में चलता हूं अगले सन्डे टेस्ट है पढ़ना भी है । 

अब ऐसे ही दिन बीत रहे थे सब नॉर्मल हो चुका था हमारी क्लासेज चल रही थी । अब मुझे सुधा दी के पास भी बैठने का टाइम काम ही मिलता था ।

देखते देखते मेरा बर्थडे आ गया, अगले दिन मेरा बर्थडे था लेकिन ये क्या आज शाम तक भी कोई एक्साइटेड नहीं था मेरा दोस्त रोहन भी नहीं , उस कमीने को तो शायद याद ही नहीं थी कि कल मेरा बर्थडे है , मेरा पूरा मूड खराब था रात का खाना खाकर मैं सीधा पढ़ने लगा । 

रात के 11:40 होते ही मेरा फोन बजा , सुधा दी का कॉल था , मैंने फोन उठाया । 
उधर से सुधा दी बोली , आशु जल्दी घर आ मधु की तब्यियत खराब है बहुत तेज बुखार है । शायद इसे लेकर हॉस्पिटल जाना पड़ेगा । 

मुझे पहले से मूड खराब होने की वजह से थोड़ी झल्लहड़ हुई लेकिन मैं फिर भी रोहन को साथ ले उनके घर चला गया  ।
मैंने घर जाकर देखा मधु एक बेड पर पड़ी है उसके साइड में सुधा दी बैठी है । 

मैंने जाते ही कहा चलिए दी हॉस्पिटल चलते है तभी दी बोली रुक 5-10 मिनट ओर देख लेते है ।
मैं वहीं साइड में कुर्सी पर बैठ गया ।

लेकिन ये क्या जैसे ही घड़ी में 11:58हुए  मधु एकदम उठ खड़ी हुई और सब हसने लगे ।
मुझे अभी भी कुछ समझ नहीं आया था । मधु उठकर बोली चलिए भैया उपर वाले रूम में चलिए सब ।

उपर एक छोटा सा रूम था । हम सब जैसे ही उपर गए मधु ने मुझे गेट खोलने को कहा  , मैंने जैसे ही गेट खोलना अन्दर रूम देख मेरी आंखे खुली रह गई अन्दर रूम को मेरे बर्थडे के लिए सजाया गया था ओर एक 3 फ्लोर का चॉकलेट केक रखा हुआ था । 

मैंने जैसे ही रोहन कि तरफ देखा , वो बोला साले तुझे क्या लगा था हम तेरा बर्थडे भूल जाएंगे । 
ये सब देख मेरा सारा मूड ठीक हो गया बल्कि बहुत ज्यादा खुशी हो रही थी के इन लोगो ने कितनी मेहनत की । 

हमने केक काटा और खूब अच्छे से सेलिब्रेट किया शायद मेरी उम्मीद से भी ज़्यादा अच्छा बर्थडे मनाया गया मेरा । फिर कुछ देर बाद सुधा दी ने कहा चलो अब असली पार्टी करते है ।
मैं सोच ही रहा था कि अब क्या बचा है तभी सुधा दी एक रेडवाइन की एक बॉटल निकाल लाई । 

वाइन की बॉटल देख रोहन के तो मुंह में पानी आने लगा था लेकिन मुझे बड़ा अजीब लग रहा था । 
तभी सुधा दी बोली शरमाओ मत बच्चो के साथ मैं खुलकर जीती हूं बाकी तो दुनिया बहुत है जज करने के लिए ओर ये तो वैसे भी रेड़वाइन हैं जो मैंने स्पेशल तेरे लिए मंगाई है आशु । 

दी कि बात सुनकर मैं थोड़ा सहज हुए तभी मधु ग्लास ले आई हमने वाइन पी , रेड वाइन मैंने पहली बार पी थी , रोहन तो शर्बत के जैसे तीन चार ग्लास गटक गया था । 
पीने के बाद मुझे ओर रोहन को तो कुछ ज्यादा असर नहीं हुआ लेकिन मधु ओर लक्ष्य को चड गई ओर वो लोग वही साइड के बेड पर सो गए ।

तभी सुधा दी बोली आशु मैंने तुझे उस दिन अपनी आधी स्टोरी सुनाई थी ना चल आज बाकी आधी सुनती हूं । 

मैं भी बाकी स्टोरी सुनने के लिए कबसे इंतजार कर रहा था तो मैंने भी के दिया हां दीदी सुनाइए ।

तब सुधा दी ने स्टार्ट किया ओर बोली , " ससुराल से आने के बाद मैंने कुछ दिन एक पार्लर पर भी काम किया था तब लक्ष्य ओर मधु छोटे छोटे थे । मेरे पार्लर के साइड में ही जीतू नाम के लड़के की एक जर्नल स्टोर कि दुकान थी । जीतू का भी बालविवाह हुए था ओर उसकी पत्नी पहले बच्चे को जन्म देकर ही मर गई थी । जीतू मीना समुदाय से था जो राजस्थान में निचली जातियों में आता है । 
जीतू आदत का बहुत अच्छा था ओर बहुत सुन्दर भी था , मैं अक्सर उसकी दुकान पर जाती थी ओर उससे बाते करके ना जाने क्यों अच्छा सा लगने लगा था , वो अक्सर मेरे छोटे छोटे बाहर के कामों में मदद कर दिया करता था । धीरे धीरे हम एक दूसरे को पसंद करने लगे थे ओर शायद हम दोनों को एकदुसरे से प्यार हो गया था । हम मिलते थे , मूवी देखने भी जाते थे लेकिन धीरे धीरे ये बात सबको पता चल गई ओर मेरे भाईयो को भी ।

घर में जीतू की कास्ट को लेकर बहुत हंगामा हुए ओर घरवालों ने मेरा पार्लर छूटा दिया । 
एक दिन जीतू हमारे घर आया , मेरे पापा से शादी की बात करने । लेकिन मेरे भाईयो को जब ये बात पता चली तो उन्होंने उसे मार पीट कर पुलिस के हवाले कर दिया , कुछ दिन बाद पुलिस से छूट कर उसने एक दिन मुझे बाहर एक खंडहर जैसे जगह पर मिलने बुलाया , हम मिले  , उसने मुझे बच्चो को लेकर उसके साथ भाग चलने को कहा लेकिन मैंने मना कर दिया । उसने मुझे बहुत मनाया लेकिन मुझे ये ना जाने क्यों अच्छा नहीं लगा ।

हमारे मिलने के बारे में मेरे बड़े भाई को ना जाने कैसे पता चल गया ओर वो दोनो छोटे भाईयो को लेकर वहा पहुंच । हमे वहा देख भाईयो ने जीतू को पीटना स्टार्ट कर दिया मार पीट में ना जाने कब  छोटे भाई ने चाकू निकाल उसपर बार कर दिया ओर चाकू जीतू के पेट में लग गया जिससे वो वहीं गिर पड़ा ओर भाई मुझे लेकर घर आने लगे । 

मैं उनके सामने बहुत रोई गिड़गिड़ाई के आज के बाद उससे कभी नहीं मिलूंगी बस उसको हॉस्पिटल पहुंचा दो वरना वो मर जाएगा लेकिन भाईयो ने मेरी एक नहीं सुनी ओर उसे वहीं छोड़ मुझे ले आए । अगले दिन अखबार में मैंने खबर पढ़ी के उसी खंडहर में एक लाश मिली थी जिसके कातिलों का कोई पता नहीं चला , मेरे मन में कई बार आया के पुलिस को जाकर बता दू के ये पाप मेरे भाईयो ने ही किया है लेकिन भाईयो के बच्चो का मुंह देख हिम्मत नहीं जुटा पाई ओर रोते रोते दिन बीतने लगे । मेरी जिंदगी में दोबारा आई खुशियां भी मेरे ही भाईयो ने समाज की घटिया सोच के वजह से छीन ली थी ।

लेकिन धीरे धीरे खोजबीन करते करते पुलिस को पता चल गया ओर भाईयो को पुलिस ने पकड़ लिया । केस चला ओर छोटे को 15 साल ओर बड़े दोनो को 5-5 साल की जेल हुए थी । 
तब मेरी आत्मा को थोड़ी शांति मिली थी लेकिन में उनके बच्चो का ध्यान रखने की पूरी कोशिश करती थी । 

अब मैंने अपना पूरा ध्यान अपने बच्चो ओर मां बाऊ जी पर लगा दिया था अब इनके लिए जी रही हूं " 


सुधा दी कि ये बाकी कहानी सुन मेरी आंखे नम सी हो गई थी । 
और मैं सोचने लगा कि यार समाज भी क्या है एक छोटी सी 15 साल की लड़की को 30 साल के शराबी आदमी के साथ ब्याह सकता है लेकिन जो उससे प्यार करता है उसे खुश रख सकता है उसे बस जात पात के लिए  मार दिया । 

सुधा दी कि कहानी सुनते सुनते कब रात के 2 बज गए थे पता ही नहीं चला था । रोहन तो शायद बीच में ही सो गया था । 
रात ज्यादा हो गई थी इसलिए दी ने कहा कि तुम दोनों भी नीचे वाले रूम में सो जाओ मैं यही मधु के पास सो जाऊंगी । 

मैं ओर रोहन नीचे आकर सो गए अगली सुबह उठ दीदी को कल रात के सेलिब्रेशन के लिए थैंक यू बोलकर हम अपने रूम पर आ गए और नाह धो कर मैं जन्मदिन पर भगवान का आशीर्वाद लेने मंदिर चला गया । 

फिर से दिन बीतने लगे थे पढ़ाई चल रही थी तभी कुछ दिन बाद कानपुर के दो लड़के कही से रूम छोड़ कर हमारे वाले पीजी में रहने आ गए और खाना भी सुधा दी के यहां खाते थे उनमें से एक का नाम गौरव ओर दूसरे का जतिन था । पीजी ओर मेस एक होने के कारण हमारी भी उनसे बात होने लगी ओर धीरे धीरे दोस्ती हो गई । 

वो दोनो भी अब मेरे साथ अक्सर सुधा दी ओर उनके परिवार से घुलने मिलने लगे थे । 
उनमें से गौरव थोड़ा स्मार्ट दिखता था , उसने ना जाने क्या किया की सुधा दी कि  मधु उसे पसंद करने लगी ओर दोनो में बात आगे बढ़ गई । 
Love , fake love , dhokha

जैसे ही मुझे इस बात का पता चला मैंने गौरव को समझाया लेकिन वो बोला कि भैया मैं भी उसे प्यार करता हूं कभी कुछ गलत नहीं करूंगा । बस आप मधु की मम्मी को कुछ मत बताना मै सिलेक्शन होने पर खुद अपने घरवालों ओर उसकी मम्मी को बता दूंगा । 

गौरव की बात मुझे कुछ सच्ची लगी इसलिए मैंने किसी को नहीं बताया बस उसपर नजर रखने लगा। 

धीरे धीरे साल बीतता गया , अब कभी कभी सुधा दी के घरसे कुछ पैसे गायब होने लगे थे जिसके वजह से उनके घर अक्सर लड़ाई होती थी । मैंने ओर रोहन ने धीरे धीरे पता लगाया कि पैसे मधु चोरी करके गौरव को दिया करती है। 

मैंने उन दोनों को समझाने की कोशिश की लेकिन गौरव ने उल्टा मधु को मेरे ही खिलाफ भड़का दिया के मैं उनसे जलता हूं । मधु और गौरव के बारे में कुछ टाइम बाद सुधा दी को भी पता चल गया उन्होंने भी दोनो को समझने की कोशिश की लेकिन वो दोनो नहीं समझे । हारकर सुधा दी ने गौरव के घर फोन कर दिया । 

गौरव के घर से भी उन्हें उल्टा ही रेस्पॉन्स मिला , उसके पापा ने उल्टा मधु पर ही इल्जाम लगा दिया के आपकी बेटी ने हमारा बेटा फसाया है । 
अंत में सुधा दी ने गौरव से रूम रूम खाली करवा लिया और मेस से भी छुट्टी करदी । 

गौरव अब वहा से दूसरे एरिया तलवंडी चला गया  था लेकिन उसकी चोरी छिपे फोन पर मधु से बात होती थी। शायद स्कूल के बाद कभी कभी मधु उससे मिलती भी थी । मधु उसके प्यार में पूरी तरह पागल थी तभी वो उसकी चालाकी भी नहीं समझ पा रही थी ।

इस सब से सुधा दी फिर से बहुत परेशान रहने लगी थी एक दिन जब मैं क्लास में था तब 4बजे सुधा दी का मैसेज आया के मधु अभी तक स्कूल से वापस नहीं आई है जो रोज 2 बजे तक वापस आ जाती थी । 

मैं मैसेज पढ़ तुरंत क्लास छोड़ गौरव की क्लास में गया आज गौरव भी कोचिंग नहीं आया था । 
मैं आगे की क्लास छोड़ सीधा सुधा दी के पास गया और उनसे घर की कीमती चीजे चेक करने को कहा । जैसे ही सुधा दी ने अपनी तिजोरी चेक की वहा से  20-25 हजार कैश ओर मधु की शादी के लिए बनाई हुई  लगभग  1 लाख की ज्वेलरी गायब थी । 

मैं समझ गया था कि मधु और गौरव भाग चुके थे। मैंने गौरव के दोस्त को फोन किया वो बोला कि गौरव तो आज 10बजे से ही किसी से मिलने का बोलकर गया है । मैंने उसे सारी बात बताई ओर कहा अगर तुझे बचना है तो जो भी पता हो या पता चले मुझे बता दे । 
फिर मै सुधा दी को लेकर पुलिस स्टेशन गया जहा हमने रिपोर्ट लिखवाई ओर पुलिस ने गौरव के घर फोन किया । उधर से गौरव के घरवाले भी कोटा आने लगे थे । वो लोग उल्टा सुधा दी पर ही इल्जाम लगाए जा रहे थे कि अगर उनके बेटे को कुछ हुए तो छोड़ेंगे नहीं । सुधा दी बहुत स्ट्रॉन्ग महिला थी जो अपने जीवन में ऐसी ऐसी ना जाने कितनी मुसीबतों से लड़ रही थी ।

मैंने गौरव के पिता से बात की और बोला की मैं गवाह हूं आपके बेटे ने भगाया है इनकी बेटी को ओर बेहला फुसला कर सामान लेकर भागा है ,  मेरी बात सुनकर गौरव के पिता कुछ शांत हुए ।

पुलिस की दो दिन की मशक्कत के बाद पता चला कि मधु मुंबई में अकेली मिली है ,वो लोग कोटा से सीधा मुंबई जाने वाली ट्रेन से गए थे । मधु को वहा से कोटा लाने पर पता चला कि गौरव उससे पैसे और ज्वेलरी लेकर अगले ही दिन गायब हो गया था। अब मधु का रो रो बुरा हाल था उसे भी समझ आ गया था कि उसके साथ धोखा हुआ है। 

सुधा दी पिछले 2-3 दिनों में भूखे प्यासे बहुत रोई , इधर उधर भटकी थी इसलिए सामने मधु को देख उनका गुस्सा फुट पड़ा ओर उन्होंने मधु को 2 थप्पड़ जड़ दिए , पुलिस सामने देख मैंने उन्हें सभाला और पुलिस में गौरव के खिलाफ ठगी की एफआईआर कर मधु को घर ले आए । 

अगले ही दिन खबर मिली के गौरव को पैसे ओर ज्वेलरी के साथ दिल्ली से पकड़ लिया गया उसको भी कोटा पुलिस स्टेशन लाया गया तब तक उसके पैरेंट्स भी कोटा पहुंच चुके थे । गौरव ने पुलिस के सामने कबूल किया कि उसने ही मधु को पैसे के लालच में आकर फसाया था ।

अब गौरव के पापा के तेवर बदल चुके थे अब वो सुधा दी से गौरव के लिए माफी मांग रहे थे कि प्लीज़ आप कोई केस मत करना , मेरे बेटे की लाइफ बर्बाद हो जाएगी । उनकी बाते सुनकर यहां भी सुधा दी ने दरियादिली दिखाई ओर गौरव पर कोई केस नहीं किया बस अपने पैसे ओर ज्वेलरी लेकर वापस आ गई । गौरव को उसके पापा वापस कानपुर ले गए । 

मैं और सुधा दी भी वापस घर आ गए अब मधु के सिर से प्यार का भूत उतार चुका था वो रो रो कर सुधा दी से माफ़ी मांग रही थी आखिर में मेरे समझाने पर दीदी ने उसे माफ कर दिया लेकिन बोली के अगले साल अपनी शादी के लिए तैयार रहे । 

धीरे धीरे मेरी भी कोचिंग पूरी हुई और एग्जाम आ गया , एग्जाम देने मैं कोटा से वापस आ गया था । 

पिछले एक साल में मैंने एक परिवार पाया था और एक अकेली औरत को बहुत सारी कठिनाइयों से अकेले लड़ते हुए देखा था , इतना सब कुछ शायद एक औरत ही बर्दास्त कर सकती थी । मैंने उनसे मुसीबतों से लड़ना सीखा था ओर हार ना मानना भी ।

मेरा एग्जाम हुए लेकिन सिलेक्शन नहीं हो पाया शायद तैयारी में कुछ कमी रह गई थी । 
मैं एग्जाम के बाद घर पर ही था तभी एक दिन सुधा दी का कॉल आया बहुत दिनों बाद आज उसने बात हो रही थी , उन्होंने बताया कि अगले 17 जून को मधु की शादी है । लड़का सॉफ्टवेयर इंजीनियर है , शादी में जरूर आना आशु । " 

मै जून कि शुरुआत में फिर से कोटा तैयारी करने गया लेकिन इस बार मेरी क्लासेज दूसरे एरिया में थी फिर भी मैं और मेरा वहीं दोस्त रोहन जो इस बार भी मेरे साथ था , 17 जून को मधु की शादी में गए । सुधा दी ने बड़े धूम धाम से शादी की थी , अब उनका बेटा लक्ष्य भी एक कंपनी में जॉब करने लगा था । 

बस इतनी सी थी ये कहानी ।

"दोस्तो सच में एक औरत हर मुसीबत से लडने की शक्ति रखती है हमारे आस पास ना जाने कितनी सुधा दी होती है जो जिंदगी की जंग अकेले दम पर लड़ती है ओर जीतती भी है बस उन्हें जरूरत होती है एक छोटे से तिनके कि जो बस उन्हें हौसला दे और शायद थोड़े से समय के लिए ही सही सुधा दी का तिनका बनकर मुझे अलग ही खुशी मिली थी,  खुद भी जीवन की कई कलाएं मैंने उनसे सीखी थी । "

 

   """"""The End """""""

10 टिप्‍पणियां:

  1. This Is Full Of Mixed Emotions...Uh Write So Well... Keep it Up...

    जवाब देंहटाएं

Blogger द्वारा संचालित.