उड़ान - A Fight With Dreams
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दोस्तो ये कहानी है सचिन , शमशाद और बिट्टू की , सचिन , शमशाद और बिट्टू मुरादाबाद के बहेड़ी गांव में रहते है ,ये गांव मुरादाबाद शहर से 30-35 किमी दूर पड़ता है । गांव में एक छोटा सा रेलवे स्टेशन भी है जहा से लोग आसानी से मुरादाबाद आना जाना करते है ।
सचिन , शमशाद और बिट्टू तीनों बचपन के जिगरी यार और तीनो ही हालत से गरीब । तीनो एक साथ ही गांव के सरकारी स्कूल में दसवीं कक्षा में पढ़ते है ।
सचिन के पिता जी चाट की ठेली लगाते है , शमशाद के अब्बू की रेडियो , टीवी , कूलर आदि ठीक करने की छोटी सी दुकान है और बिट्टू के पिताजी मुरादाबाद में एक स्पोर्ट्स की दुकान में हेल्पर का काम करते है
तीनो की ही आमदनी बस इतनी ही है जिससे बस घर चल रहे है इन घरों में कोई शौक तो जैसे सपना हो , किसी का पूरा नही होता
सचिन , शमशाद और बिट्टू अक्सर स्कूल के बाद शाम को शमशाद के पापा की दुकान पर टीवी देखने इकट्ठा होते थे क्योंकि तीनो के ही घर में टीवी नहीं था , दुकान पर तो ठीक होने आए टीवी चलते रहते थे । वो लोग अक्सर क्रिकेट मैच देखा करते थे , क्रिकेट देखते देखते उन तीनो ने भी मोहल्ले के और लडको के साथ खेलना शुरू कर दिया , उन्हें अब क्रिकेट खेलने का शौक लग गया लेकिन उनके क्रिकेट बैट लकड़ी की फट्टी के होते थे और बॉल भी सस्ती वाली
बिट्टू अक्सर अपने पापा से जिद करता की आप तो स्पोर्ट्स की दुकान पर काम करते हो मुझे बैट बॉल ला कर दो लेकिन बैट बॉल की कीमत अपनी दो दिन की मजदूरी के बराबर होने के कारण उसके पापा उसकी जिद हर बार टाल देते
गांव में दो ग्राउंड थे एक गांव के महंगे प्राइवेट स्कूल का सपाट और बेहतरीन ग्राउंड जिसपर उस गांव के अमीर घरों के बच्चे खेलते थे और दूसरा सरकारी स्कूल का ऊबड़ खाबड़ ग्राउंड जिसपर गांव के सचिन , शमशाद और बिट्टू जैसे गरीब घरों के बच्चे खेला करते थे
वो तीनो अक्सर प्राइवेट स्कूल की बाउंड्री के पास खड़े हो अमीर बच्चो को खेलते देखा करते थे , उनके पास अच्छे बेट , बॉल , ग्लव्स जैसे सारे सामान हुआ करते थे लेकिन उनका खेल देख सचिन , शमशाद और बिट्टू सोचते के काश इनके साथ मुकाबला हो तो इन्हे हम आसानी से हरा दे
मैच देख देख और खेलकर उन तीनो का खेल काफी अच्छा हो गया था
सचिन और बिट्टू काफी अच्छी बैटिंग करते और शमशाद की स्पिन बॉलिंग के सामने कोई ही टिक पाता था ।
अमीर बच्चो के साथ खेलने का उन तीनो का सपना जल्दी पूरा हो हुआ, कुछ ही दिनों में उनके गांव में प्रधान पद के इलेक्शन होने वाले थे , प्रधान पद के ही एक उम्मीदवार ने गांव में अपना प्रचार करने के लिए गांव के बच्चो के बीच खेल प्रतियोगिता करवाने का निर्णय लिया ताकि गांव वाले लोग बच्चो का खेल देखने आए और वो अपना प्रचार कर सके
खो खो, कबड्डी , दौड़ के साथ साथ क्रिकेट मैच भी कराने का निर्णय हुआ । क्रिकेट की दो टीम बनी एक प्राइवेट स्कूल के बच्चो की ओर दूसरी सरकारी स्कूल की टीम , जिसका कप्तान सचिन था
क्रिकेट मैच जीतने वाली टीम को 501 और हारने वाली को हौसला अफजाई के लिए 100 रुपए का इनाम देने की घोषणा प्रधान पद उम्मीदवार ने की ।
आज से 5 दिन बाद प्राइवेट स्कूल के ग्राउंड पर क्रिकेट मैच होने का निर्णय हुआ । सचिन और उसकी टीम रोज घंटो घंटो प्रैक्टिस करने लगे उनकी निगाह मैच जीतकर मिलने वाले इनाम पर थी ताकि वो अपने लिए बैट और अच्छी बॉल खरीद सके
आज मैच का दिन था गांव की काफी भीड़ जमा हुई , मैच शुरू हुआ , टॉस जीतकर सचिन ने पहले बल्लेबाची का निर्णय किया । सचिन और बिट्टू अपनी टीम के लिए ओपनिंग करने आए , लेकिन ये क्या सचिन और बिट्टू दोनो के ही पास लकड़ी की फट्टी के बल्ले थे जिसे देख प्राइवेट स्कूल की टीम उनपर हस रही थी , उनकी हसी को दरकिनार कर सचिन , बिट्टू ने पारी स्टार्ट की प्राइवेट स्कूल की तरफ से पहला ओवर समीर चौहान कर रहा था जिसकी फास्ट बालिंग के काफी चर्चे थे
समीर ने पहली ही बॉल बाउंसर की जो सचिन के कान के पास से सनसनाती हुई गुजर गई । समीर सचिन के पास आया और बोला छोटू अगली बार डंडा उखड़ेगा
सचिन ने गहरी सांस ली और भगवान को याद कर अपना कॉन्फिडेंस न खोते हुए खेलने का निर्णय किया । अगली बॉल समीर ने यॉर्कर कराने की कोशिश की जिसे सचिन ने आगे बढ़कर फुल्टोस बना एक शानदार छक्का जड़ दिया , लोग तालिया बजाने लगे ।
ऐसे ही आत्मविश्वास से खेलते हुए सचिन ने पहले ही ओवर में 15 रन, एक छक्के और 2 चोक्के की मदद से लगा दिए ।
दूसरे ओवर में बिट्टू ने भी अच्छी बैटिंग की ओर अब सरकारी स्कूल की टीम का स्कोर दो ओवर में 27 रन हो चुका था ।
आगे भी ऐसे ही शानदार खेलते हुए सचिन बिट्टू की जोड़ी ने 5 ओवर में ही 55 रन जड़ डाले जिनमे से 33 सचिन और 22 रन बिट्टू ने बनाए लेकिन छठे ओवर की तीसरी गेंद पर शॉट मरने के चक्कर में बिट्टू बाउंड्री पर थमा बैठा और सरकारी स्कूल की टीम का पहला विकेट गिर गया
लेकिन दूसरी ओर सचिन ने सभालकर खेलते हुए पारी को आगे बढ़ाना जारी रखा उसने दूसरे खिलाड़ियों के साथ मिलकर कुल 12 ओवर के मैच में टीम का स्कोर 5 विकेट खोकर 147 रन कर दिया जिसने उसने 5 छक्को और 3 चोक्को की मदद से अकेले 75 रन बनाए ।
अब बारी प्राइवेट स्कूल की बैटिंग की थी , प्राइवेट स्कूल के ओपनर रचित और मयंक हाथो में चमकते हुए एमआरएफ के बैट लेकर उतरे , सरकारी स्कूल की तरफ से पहला ओवर शमशाद ने किया जिसमे उसने अपनी स्पिन के जाल में फसाते हुए रचित का विकेट लेकर कुल 4 ही रन दिए
लेकिन दूसरा ओवर कराने आए गौरव के ओवर में प्राइवेट स्कूल के मयंक ने दो शानदार छक्के जड़ अपनी टीम को संभाल लिया
बॉलिंग होती रही, एक ओर शमशाद रन गति पर रोक लगाता तो दूसरी ओर दूसरे बॉलर्स के ओवर में मयंक अच्छे शॉट्स खेलकर मैच बराबरी पर ला देता , सरकारी स्कूल की टीम की तरफ से फील्डिंग काफी खराब हुई उनकी टीम ने मयंक के कई कैच छोड़े
अब आखिरी 2 ओवर में प्राइवेट स्कूल को 20 रन बनाने थे , जो मयंक की बैटिंग देख आसान ही लग रहा था । दो ओवर में से एक ओवर शमशाद का बाकी था । सरकारी स्कूल के कप्तान सचिन ने 11वा ओवर गौरव को दिया जिसने उसने 15 रन लुटा दिए अब एक ओवर में मात्र 5 रन की जरूरत थी
सचिन ने अपनी टीम के सारे लडको को बुला हार न मानने की सलाह दी और बॉल शमशाद को बॉल थमाते हुए इनाम पर ध्यान दे अपनी बेस्ट बॉलिंग करने को कहा
शमशाद ने पहली 2 बॉल डॉट करा मैच में सबकी धड़कने बढ़ा दी और तीसरी बॉल गुगली कराते हुए मयंक का महत्वपूर्ण विकेट झटक लिया , और अगली दो बॉल पर दो और विकेट लेकर हैट्रिक लेली अब मैच पूरी तरह सरकारी स्कूल की पकड़ में था आखिरी बॉल पर छक्का मार जिताने लायक प्राइवेट स्कूल की टीम में कोई खिलाड़ी नही था , शमशाद ने आखिरी बॉल डाली , प्राइवेट स्कूल के वरुण ने उठा कर शॉट मारा सबकी सांसे अटक गई , बॉल हवा में काफी ऊपर तक गई फिल्डर बॉल के नीचे था लेकिन घबराहट में मिसफिलेडिंग के कारण कैच छूट गया लेकिन किस्मत से बॉल बाउंड्री से थोड़ा सा पहले ही गिर गई और प्राइवेट स्कूल की टीम को सिर्फ 4 रन मिले और सरकारी स्कूल की टीम 1 रन से मैच जीत ग
खुशी से सचिन की टीम ग्राउंड में नाचने लगी और उनके मोहल्ले के बच्चे भी ग्राउंड में आ गए । आज के मैच में संसाधनों पर टैलेंट की जीत हुई थी । चारो तरफ सचिन की टीम की तारीफ होने लगी ।
सचिन की टीम को 501 रुपए का इनाम मिला जिसे उन्होंने अगले ही दिन मुरादाबाद जा कर बिट्टू के पापा वाली दुकान से एक एमआरएफ का बैट और 3 अच्छी अच्छी बॉल खरीद ली
अब वो तीनो क्रिकेट में खूब मेहनत करने लगे उनमें से सचिन काफी अच्छी बैटिंग करने लगा उसके चर्चे आस पास के गांव में भी होने लगे
अब उन तीनो को अक्सर प्राइवेट स्कूल वाले अपनी टीम से भी खिलाने लगे
कुछ दिन बाद मुरादाबाद में एक बड़े टूर्नामेंट का आयोजन होने वाला था जिसकी एंट्री फीस 3 हजार रुपए प्रति टीम थी उस टूर्नामेंट की खास बात ये थी के उसमे चीफ गेस्ट मुरादाबाद के ही इंटरनेशनल क्रिकेटर पियूष चावला होने वाले थे , जिनकी खुद की क्रिकेट एकेडमी भी थी मतलब अगर कोई खिलाड़ी उनकी नजरों में आ गया तो उसको एकेडमी के दाखिला भी मिल सकता था
टूर्नामेंट की फीस 3 हजार रुपए सचिन की टीम को जुटा पाना बहुत मुश्किल था इसलिए उसने और उसके दोनो साथियों ने प्राइवेट स्कूल की टीम से खेलने का निर्णय किया जहा से उन्हें पहले से ऑफर था लेकिन वहा भी उन्हें अपने हिस्से के प्रति खिलाड़ी 250 रुपए जमा करने थे जो उन तीनो में लिए अभी भी मुश्किल था , लेकिन उन तीनो को टीम के लिए जरूरी समझ प्राइवेट स्कूल के कप्तान मयंक ने तीनो को 750 बजाए बस 500 रुपए लाने को बोला । अब वो तीनो 500 रुपए का जुगाड करने में जुट गए , घरों से तो पैसे मिलने की उम्मीद बिलकुल थी ही नहीं फिर कोई तरीका ना सूझने पर तीनो ने एक दिन स्कूल से भाग कर पास के गांव में धान की रोपाई की मजदूरी कर पैसे का जुगाड कर लिया , मजदूरी से उन्हें 600 रुपए मिले जिनमे से 500 एंट्री फीस देकर उन्होंने टीम में अपनी जगह पक्की कर ली
अब टूर्नामेंट होने में सिर्फ 3 दिन बचे थे सब कुछ सही था , सचिन , शमशाद और बिट्टू खूब प्रैक्टिस कर एकदम तैयार थे लेकिन आम आदमी की किस्मत कदम कदम पर उसका इम्तेहान लेती
और कुछ हुआ भी ऐसा ही , एक दिन काम से वापस लौटते हुए बिट्टू के पापा जिस ऑटो से आ रहे थे उसका एक कार से एक्सीडेंट हो गया और बिट्टू के पापा को काफी चोट लग गई , बिट्टू को उनके साथ हॉस्पिटल में रुकना पड़ा , घर की सारी जिम्मेदारियां उसपर एकदम से आ गई ,वो टूर्नामेंट में पार्टिसिपेट नही कर सका ।
खेर टूर्नामेंट शुरू हुआ , पहले ही मैच में सचिन में मयंक के साथ ओपनिंग करते हुए शानदार 75 रन जड़ सारे टूर्नामेंट का आकर्षण बन गया , ओपनिंग सेरेमनी में आए एक लोकल नेता जी ने उसकी पीठ थपथपाते हुए मैन ऑफ द मैच का अवार्ड दिया
दूसरी ओर शमशाद ने भी मैच में 3 विकेट ले खूब वह वाही लूटी ।
सारे टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन करते हुए सचिन शमशाद ने अपनी टीम को फाइनल तक पहुंचा दिया , अब उनका फाइनल मैच मुरादाबाद की एक टीम से होना था जिसमें पियूष चावला की एकेडमी के भी 3 प्लेयर थे उनका काफी नाम भी था
सचिन और शमशाद अपने खेल से काफी खुश थे क्योंकि सचिन ने अभी तक सबसे ज्यादा रन बनाए थे और शमशाद ने सबसे ज्यादा विकेट लिए हुए थे
फाइनल मैच 2 दिन बाद होने वाला था लेकिन किस्मत में फिर पलटी मारी मैच से एक दिन पहले प्रैक्टिस करते हुए शमशाद के कंधे में खिंचाव आ गया अब उसका मैच खेल पाना मुश्किल लग रहा था लेकिन टीम के पास उसके जैसा कोई दूसरा बॉलर नही था
फाइनल मैच का दिन आ गया , शमशाद ने दर्द होने के बावजूद खेलने का फैसला लिया
फाइनल मैच में मुरादाबाद की टीम ने 16 ओवर में ही 175 रन का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया , इस मैच में शमशाद अपना सौ प्रतिशत नही दे पाया उसने 4 ओवर में 30 रन देकर देकर सिर्फ एक विकेट लिया ।
स्कोर बड़ा था लेकिन टीम को अपनी बैटिंग से उम्मीद थी कि सचिन और मयंक की जोड़ी चल गई तो ये भी आसानी से बन जायेगा
अब बहेड़ी की टीम की बैटिंग की बारी थी
सचिन और मयंक ने अच्छी शुरुआत की लेकिन 75 रन के कुल स्कोर पर मयंक का विकेट खो दिया दूसरी ओर सचिन अभी भी 40 रन बना कर खेल रहा था , मयंक का विकेट गिने के बाद सचिन ने समझदारी से पारी को आगे बढ़ाया , दूसरी ओर विकेट गिरते रहे लेकिन वो अकेले टीम की उम्मीद बन खड़ा रहा और छोटी छोटी पार्टनर शिप करते हुए 15 ओवर में स्कोर 8 विकेट पर 155 रन पहुंचा दिया अब आखिरी ओवर में उन्हें जीत के लिए 21 रन चाहिए थे जो पियूष चावला की एकेडमी का बॉलर कराने वाला था , स्ट्राइक सचिन पर थी
16वे ओवर की पहली बॉल पर उसने अपने साथी जतिन से बात की के तेज भागने के लिए तैयार रहे भाग कर भी रन लेने है
ओवर की पहली बॉल हुई और सचिन ने स्ट्रेट ड्राइव मारा ओर रन के लिए दौड़ पड़ा एक रन आसानी से हुआ लेकिन स्ट्राइक अपने पास रखने और थोड़ी सी मिस फील्डिंग देख सचिन दूसरे रन के लिए दौड़ पड़ा लेकिन ये क्या सचिन तो दूसरी साइड सेफ पहुंच गया लेकिन जतिन रन आउट हो गया । अब स्ट्राइक तो सचिन के पास ही थी लेकिन विकेट सिर्फ एक ही बचा था और 5 बॉल में जीत के लिए 20 रन अभी भी चाहिए थे । अब सचिन ने सारी बॉल खुद खेलने का निर्णय लिया और दूसरी बॉल पे शानदार कवर ड्राइव लगा चौक्का मार दिया अब टीम को 4 बॉल में 16 रन चाहिए थे । मैदान में मैच देखने आए लोगो की धड़कने बढ़ चुकी थी , चारो तरफ सचिन सचिन गूंज रहा था मानो जैसे सचिन तेंदुलकर खेल रहा हो , तीसरी बॉल हुई और ये क्या बॉलर ने सचिन को परख बॉल थोड़ा विकेट से बाहर डाली और खाली निकाल दी , एक डॉट बॉल से सारा प्रेशर अब सचिन पर आ गया लेकिन उसने हार नही मानी , चौथी बॉल पर फिर एक शानदार चौका मार दिया अब 2 बॉल में जीत के लिए 12 रन चाहिए थे
पांचवी बॉल पर फिर सचिन ने आगे बढ़ स्ट्रेट में एक शानदार छक्का जड़ दिया अब मैच बहुत रोमांचक हो चुका था आखिरी बॉल पर जीत के लिए 6 रन और स्ट्राइक पर अभी भी सचिन , ऐसा लग रहा था मानो कोई इंटरनेशनल मैच चल रहा हो
दर्शकों का शोर ओर बढ़ चुका था । सचिन की सांसे भी तेज चलने लगी थी मुरादाबाद की टीम आखिरी बॉल के लिए अपनी फील्डिंग सेट करने लगी तभी काउमेंट्री बॉक्स से आवाज आई के सचिन का पर्सनल स्कोर भी 94 पहुंच चुका है और अगर उसने छक्का मार मैच जिताया तो 100रन बनाने वाला वो टूर्नामेंट का पहला खिलाड़ी होगा
अब आखिरी बॉल होने वाली थी सचिन ने एक गहरी सांस ले भगवान को याद कर बॉल का सामना करने को तैयार हुआ , बॉलर ने आखिरी बॉल यॉर्कर कराई लेकिन सचिन ने एक कदम आगे निकलते हुए एक शानदार शॉट मारा , बॉल हवा में बाउंड्री की तरफ , बॉल के बिल्कुल नीचे फिल्डर लेकिन लग रहा था बॉल बिलकुल बाउंड्री के अंदर गिरेगी पर ये क्या बिलकुल बाउंड्री पर कैच 😱😱
चारो तरफ सन्नाटा , किसी को भरोसा नही हो रहा था ये क्या हुआ सब अंपायर की इशारे का इंतजार करने लगे ..
और ये क्या अंपायर का इशारा 6 रन , क्यूंकि फिल्डर का पाव कैच करते हुए बाउंड्री से टच कर गया था , किस्मत हर बार धोखा भी नही देती इस बार किस्मत सचिन के साथ थी
इसी आखिरी बॉल पर 6 रन के साथ बहेड़ी की टीम ने मैच जीत लिया , सारी टीम ग्राउंड में दौड़ पड़ी और आकर सबने सचिन को कंधो पर उठा लिया
सचिन को मैन ऑफ द मैच के साथ साथ मैन ऑफ द टूर्नामेंट का अवार्ड भी मिला वो भी पियूष चावला से और वही स्टेज से पियूष ने अनाउंस किया की अब सचिन और उसके साथ साथ पिछले मैचों में बेहतरीन बॉलिंग करने वाले शमशाद को को उनकी एकेडमी में फ्री क्रिकेट की कोचिंग दी जाएगी । साथ ही सचिन को 10हजार और शमशाद को 5 हजार नगद इनाम भी दिया गया
ये बात मानो सचिन और शमशाद के लिए सपने जैसे हो वो दोनो बहुत खुश थे और उन्हें अपना तीसरा दोस्त बिट्टू बहुत याद आ रहा था
वो दोनो मैच के बाद सीधा बिट्टू से मिलने मुरादाबाद में ही उस हॉस्पिटल में पहुंचे जहा उसके पापा का इलाज चल रहा था और जाते ही अपने दोस्त को गले लगा लिया और दोनो ने इनाम में मिले पैसे अपने दोस्त के हाथ में रख दिए
अपने दोस्तो को इतना खुश और जरूरत ने अपनी मदद करता देख बिट्टू की आंखों में आसूं आ गए
वो तीनो कई मिनट तक एकदूसरे के गले लगे रहे।
पार्ट 2 to be continue.......... if this part 1 got 200+ read 🥰 ....
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This is woowww...!!!!
जवाब देंहटाएंKeep Writing More...!!!🤍
Thnq , keep supporting
हटाएंZabardast bhai
जवाब देंहटाएं2nd part ka wait rhega
Thnx buddy❤️
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जवाब देंहटाएंBhut hi umda
जवाब देंहटाएंThnxxx
हटाएंVery nice bhai mja aa gya
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