Angel On The Wheels
मैं अक्सर सोचता था क्या वो नानी की कहानियों वाली परियां सच में होती है ?
क्या वो गजलों में लिखी गई खुबसूरती हकीकत होती है ?
क्या नजरो के तीर और जुल्फों की काली छाव सच मैं होती है ?
मैं उसे देखने से पहले इसे सिर्फ शायरों की कल्पना समझता था
लेकिन उसे देखने के बाद लगा जैसे शायरो की उस ख्वाब वाली हकीकत से रूबरू हो गया हूं ।
ओह सॉरी !
मैं उसकी खूबसूरती बयान करने के चक्कर में अपना और उसका इंट्रो ही देना भूल गया ।
हेल्लो दोस्तो , मेरा नाम है रोहन शर्मा ।
मेरी उम्र लगभग 30 वर्ष है । वैसे तो मैं मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के एक छोटे से गांव से हु लेकिन फिलहाल मैं हरिद्वार के गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय से संस्कृत भाषा में बीए प्रथम वर्ष का छात्र हूं इससे पहले मैं हिंदी साहित्य में पीएचडी कर चुका हूं और कहानी एवम कविताएं लिखने का शौक रखता हूं ।
संस्कृत यू तो मेरा पसंदीदा विषय नही था लेकिन उत्सुकता और नए विषयों को जानने के मेरे स्वभाव के कारण में यहां देवभूमि उत्तराखंड के पवित्र शहर हरिद्वार में आ गया और संस्कृत विषय चुन लिया संस्कृत चुनते हुए मुझे लगा था कि मैं शायद ही अपनी ये डिग्री पूरी कर पाऊंगा क्युकी सब कहते थे बहुत बोरिंग विषय है
लेकिन कब इस विषय से तीन महीने में ही इतना प्रेम हो गया पता ही नही चला या यू कहे संस्कृत पढ़ाने वाली मैडम से !
जी हां आपने सही सुना संस्कृत वाली मैडम रिया चौधरी , जिस खूबसूरती का जिक्र मैंने कहानी की शुरुआत में किया वही , वो जिक्र तो एक झलकी था आइए अब आपको उनसे मिलवाते ही है ।
रिया मैम , सॉरी मैम थोड़ा अजीब लग रहा है इसलिए रिया ही कहते है वैसे भी उनकी और मेरी उम्र लगभग बराबर ही होगी , असली उम्र पूछने की तो कभी हिम्मत ही नही हुई !
लेकिन जब भी उनका जिक्र करता हूं मुझे मेरे कॉलेज का वो पहला दिन याद आ जाता है , कॉलेज का पहला दिन था हमारी क्लास की टाइमिंग 9 बजे थी और मैं ठहरा लेट लतीफ लेकिन उस दिन जैसे तैसे मैं 8:55 बजे क्लास पहुंच गया था क्लास में लगभग 25 बच्चे होंगे ठीक 9 बजे एक प्रोफेसर साहब आए सबका सामान्य परिचय होने के बाद क्लास हुई और उस 1 घंटे की क्लास में ही मैं 3- 4 बार झपकी ले चुका था क्लास का पहला ही दिन और पहली ही क्लास इतनी बोरिंग होगी मैंने सोचा नही था खेर क्लास खत्म हुई और अगली क्लास के बीच 1 घंटे का गैप होने के कारण मैं कैंपस में टहलने निकल पड़ा ,
संस्कृत विश्वविद्यालय थोड़ा पुराना था लेकिन हरियाली और मूर्ति कलाकारी के कारण काफी सुंदर दिखता था मैं घूमते घूमते एक फब्बारे के पास पहुंच गया तभी मेरी निगाह पास ही की एक मूर्ति के पास व्हीलचेयर पर बैठी एक लड़की पर पड़ी , वो लड़की उस मूर्ति से ही कुछ बातें कर रही थी मुझे थोड़ा अजीब लगा की मूर्ति से कौन बातें करता है लेकिन मैं तो खुद उसकी खूबसूरती में ही कही खो गया था उसके लंबे काले व्हीलचेयर से जमीन को छूते बाल और आंखो और होठों के बीच परस्पर ऐसा तालमेल की शायद वो मूर्ति भी उसकी बातें सुन बोल उठे । मैं कुछ देर ऐसे ही देखता रहा लेकिन उसकी मासूमियत हर बार हिलते उसके होठों के साथ बढ़ती ही जा रही थी अंततः मैने पास जाकर कह ही दिया , "मैडम अब रहने भी दीजिए अब क्या पत्थर में जान डालकर ही मानोगी "
अचानक से मेरी आवाज सुन वो पीछे मुड़ी और एक बार मेरी तरफ देख अपनी व्हीलचेयर को चला जाने लगी ।
मैंने एक बार फिर कहा मैडम कुछ बातें बाकी रह गई हो तो कर लीजिए मैं जा रहा हूं लेकिन वो मेरी बातो को इग्नोर कर आगे बढ़ गई उसके जाने के बाद मुझे एहसास हुआ के मैंने बिना उसे जाने उसकी प्राइवेसी भंग कर दी , मैं कुछ देर इसी आत्मग्लानि में रहा लेकिन घड़ी पर ध्यान जाने पर याद आया कि अगली क्लास का समय हो गया था ।
मैं जल्दी जल्दी खुद को संभाल क्लास की तरफ लपका और क्लास में पहुंच सीट पर बैठकर एक घुट पानी पीकर प्रोफेसर के आने का इंतजार बाकी क्लास के साथ करने लगा ।
प्रोफेसर के थोड़ा लेट होने के कारण मेरा दिमाग मुझे फिर से गार्डन वाली घटना पर ले गया और एक बार फिर मेरी आंखो के सामने वो व्हीलचेयर पर बैठी परी आ गई ।
लेकिन चंद मिनटों में बार गुड आफ्टरनून मैम की एकसाथ आवाज ने मेरा ध्यान क्लास की तरफ वापस खींचा , मैंने सामने देखा , और ये क्या !!!
वो व्हीलचेयर वाली लड़की !!
सामने पोडियम पर !!
मैं मन ही मन सोचने लगा बेटा रोहन ये क्या कर दिया तूने
वो तो तेरी प्रोफेसर निकली अब तो बेटा तुम गए ।
मैं ये सब सोच ही रहा था तभी एकबार फिर ,
"हेलो क्लास .....
मेरा नाम रिया चौधरी है और मैं आपकी संस्कृत व्याकरण की प्रोफेसर हूं "
ने मेरा ध्यान अपनी ओर खींचा ।
तभी मैडम ने कहा कि अब सब एक एक कर अपना परिचय देंगे और साथ ही अपनी अभिरुचि भी बताएंगे।
सभी ने अपना अपना परिचय देना शुरू किया लेकिन जैसे जैसे मेरा नंबर करीब आ रहा था मेरी धड़कने तेज होती जा रही थी , कुछ देर बाद मेरा नंबर आया मैं अपनी जगह खड़ा हुआ , लेकिन ये क्या मेरी धड़कने इतनी तेज हो चुकी थी की मेरी आवाज ही नही निकल पा रही थी फिर भी मैंने कंट्रोल कर धीरे से कहा मैम मेरा नाम रोहन शर्मा है , मैंने घबराहट में इतनी धीरे बोला होगा की शायद मेरे पास वाले लड़के को भी मेरी आवाज नही गई होगी ।
मेरी हालात पतली देख सारी क्लास हंसने लगी ।
तभी रिया मैम ने कहा ," मिस्टर कभी कभी मूर्तियों से बात कर लेन अच्छा होता है ताकि इंसानों के सामने अच्छे से बोल पाओ"।
मैडम की बात सुन मेरा सिर शर्म से झुक गया और बिना कुछ बोलने बैठने लगा तभी मैम ने एक बार फिर टोका , "यार तुम तो बुरा मान गए ,चलो एक बार मुस्करा कर फिर से कोशिश करो "
इस बार मैंने हिम्मत जुटाकर बोला , " मैम मेरा नाम रोहन शर्मा है और मैं यूपी से हूं , मुझे लिखना पसंद है .
मेरा परिचय सुन मैम ने कहा , अरे वाह मिस्टर रोहन तो शायर है , चलिए कुछ लाइनें सुना दीजिए ।
मैं शर्म से नीचे सिर कर मुस्कुराने लगा तभी मैम ने कहा ,"अरे शर्माइये मत हम सभी दोस्त है सुना दीजिए कुछ अच्छा सा "
उनकी बाते सुन मैं थोड़ा सहज हुआ और उनको गार्डन में देख मेरे मन में आई कुछ पंक्तियां ,
" के यू तो खुदा ने आसमां को चांद तारो से सजाया है
मगर आज हुस्न को परखने चांद जमीं पर आया है "
सुना दी , शायरी सुन क्लास वाह वाह करने लगी और मैम ने भी "बहुत खूब क्या बात है मिस्टर रोहन " कह मुझे बैठने को कहा । फिर बाकी बचे लोगो का परिचय हुआ लेकिन मेरी नज़रे सारा टाइम रिया को ही देखती रही और इसी तरह कब एक घंटे की क्लास खत्म हो गई पता भी नही चला ।
क्लास के बाद मैं रिया के पीछे पीछे उनके चैंबर तक गया और अपनी गार्डन वाली हरकत के लिए सॉरी बोला ।
जवाब में रिया सिर्फ , " अरे कोई बात नही "बोलकर अपने काम मे लग गई और मैं चैन की सांस लेते हुए वापस आ गया।
पहले दिन बस दोपहर तक ही क्लास हुई
कॉलेज से हॉस्टल आकर मुझे इस बात की खुशी थी के चलो संस्कृत ज्यादा बोरिंग विषय नही रहेगा अब , रात को भी अगले दिन कॉलेज की एक्साइटमेंट और बार बार आते रिया के ख्याल से में 1 बजे तक सो नही पाया और अपनी डायरी में रिया की खूबसूरती पर 2-3 कविताएं लिख दी ।
अगले दिन सुबह उठ में तैयार हो चेहरे पर अपनी फेवरेट मुस्कान लिए कॉलेज पहुंच गया , पहली क्लास उन्ही बोरिंग प्रोफेसर की हुई लेकिन मैं उनकी क्लास खत्म होने ओर रिया की क्लास शुरू होने का इंतजार करता रहा । क्लास खत्म होते ही मैं गार्डन में उसी और निकल पड़ा जहा कल रिया मुझे मिली थी लेकिन वो वहा भी नही थी आखिर में केंटीन जा कर जैसे तैसे एक घंटा बीता कर रिया की क्लास शुरू होने से 10 मिनट पहले ही आखिरी बेंच से उठकर तीसरी पर आकर बैठ गया । क्लास के ठीक टाइम पर अपनी व्हीलचेयर चलाते हुए रिया क्लास में आई उनको दरवाजे से आते देख ही मैं मुस्कुराने लगा उन्होंने नोटिस तो किया लेकिन इग्नोर कर डेस्क के पीछे अपनी चेयर लगाकर बैग से एक बुक खोल सीधा पढ़ाने लगी । उन्होंने लगातार 40 मिनट संधि प्रकरण पढ़ाया जो मेरे बिल्कुल सिर के ऊपर से गया क्यूंकि आधा टाइम तो मैं बस उनकी आंखो और उनके साथ तालमेल से बोलते होठों को ही देखता रहा था , आखिरी में उन्होंने पूछा ,
"किसी को कोई डाउट स्टूडेंट्स "
सबके साथ साथ मैने भी नो मैम बोल दिया लेकिन मन ही मन सोचने लगा की बेटा रोहन इनको बोल दे के रिया जी ये आपकी वाली संधि नही अपना मन तो आपसे संधि कर चुका है , मेरे इन्ही ख्याली जद्दोजहद के बीच रिया ने फिर से कहा ," मुझे पता है आप में से आधे लोगो को समझ नही आया होगा इसलिए कुछ बुक्स बता रही हु वो खरीद कर पढ़ना और क्लास ध्यान से करना , सब समझ आने लगेगा , स्पेशली आप मिस्टर रोहन "
मेरा नाम सुन मै फिर से जागा , और "जी मैम बोल पड़ा! उनको जब जब मैम बोलना पड़ता तब तब मेरे अंदर का शायर एक विरह की पंक्ति सोच लेता । कितना मुश्किल था ये बस मुझे ही पता है ।
खैर इसी तरह दिन बीतने लगे , रोज क्लास होती मैं घर आता रिया की बताई बुक्स से पढ़ता फिर क्लास में जाकर समझने की कोशिश करता लेकिन मुश्किल से ही कुछ चीजे पल्ले पड़ती , लेकिन अब धीरे धीरे मेरी रिया से काफी अच्छी स्टूडेंट टीचर वाली ही सही बॉन्डिंग हो गई थी बीच बीच में कभी कभी वो क्लास में ही मेरी शायरी का मुशायरा करवा देती थी दिन सही बीत रहे थे । मैं अगर किसी दिन क्लास नही जाता तो वो पूछती आज शायर साहब क्या किसी मुशायरे में गए है जो क्लास नही आए ।
एक दिन रात को हम हॉस्टल के कुछ लड़के मेरे रूम में बैठकर चाय पी रहे थे तभी मेरा रूममेट , आफताब जो कुछ हद तक जनता था की मैं रिया को पसंद करता हु , बोल उठा " क्यू भाई रोहन क्या सोचा है कब तक यूंही उनकी खूबसूरती पर अल्फाज गढ़ते रहोगे , इजहार करो मिया यार अब ।
तभी दूसरा दोस्त अशोक बोला ," अरे इन भाईसाब के तो अलग ही जलवे है इश्क किया वो भी प्रोफेसर से , सीधा फेल करवाएगी बेटा ।
अभी में ये सब सुन ही रहा था की एक और रंजीत बोल उठा ," अरे यार भाई की आशिकी तो बेकार ही है मैडम तो व्हीलचेयर से उठ ही नही पाती क्या ही फायदा होगा अगर मान भी गई तो ।
रंजीत की बात सुन मेरा पारा हाई हो गया ,मेरे चेहरे के भाव देख आफताब बोला ," अबे मिया रंजीत क्या बाते करते हो सब तुम्हारी तरह जिस्मानी मोहब्बत नही करते , हमारे शायर साहब को सच्चा इश्क हुआ है रिया जी से ।
सब सुनते सुनते मैं उठा और ," चलिए काफी रात हो गई है अब सुबह मिलते है" बोल सबको रूम से दफा किया ।
सबके जाने पर मैने आफताब को हिदायत दी के आज के बाद कमरे में कोई बकेती के लिए नही आना चाहिए ।
सुबह हुई , नाह - धोकर केंटीन में नाश्ता कर हम लोग कॉलेज पहुंचे , जाते ही नोटिस बोर्ड पर जमा भीड़ की तरफ ध्यान गया । मैं और आफताब भी उस और चल दिए जाकर देखा तो 15 दिन बाद इंटरनल एग्जाम्स का नोटिस चिपका था और इस बार से इंटरनल एग्जाम्स के नंबर भी मुख्य परीक्षा में जुड़ने वाले थे ।
नोटिस पढ़ते ही मैने आफताब की तरफ देखा उसने मेरी तरफ ऐसे जैसे मानो वो कह रहा हो और करो बेटा आशिकी ।
खैर नोटिस देख हम क्लास में पहुंचे
क्लास शुरू हुई , उन बोरिंग वाले प्रोफेसर ने कुछ इंपोर्टेंट टॉपिक मार्क करवा दिए ।
ब्रेक टाइम में मैं वही पढ़ता रहा और अगली क्लास रिया की हुई उन्होंने ना कुछ मार्क करवाया और न ही एग्जाम की कोई बात की ।
क्लास के बाद मैं पीछे पीछे उनके चैंबर तक गया और चैंबर में जाकर बोला , मैम इंटरनल्स आ रहे है कुछ इंपोर्टेंट बता देते तो अच्छा होता , ये सुनकर रिया मुस्कुराई और बोली "अरे शायर साहब व्याकरण में सब इंपोर्टेंट होता है और कुछ भी एग्जाम में पूछा जा सकता है इसलिए मैं और टीचर्स की तरह मार्क नही करवाती "।
उनकी बात सुन मैने कहा ," लेकिन मैम मेरी हालत बहुत खस्ता है इतनी कोशिश करने पर भी कुछ ज्यादा समझ नही आता " ।
तब वो बोली ,"चलिए एक काम करते है , मैं गर्ल्स हॉस्टल के दूसरी ओर वाले टीचर्स अपार्टमेंट्स मे रहती हु आप कॉलेज के बाद शाम को 5 बजे उसके सामने वाले पार्क में आ जाया करे ,मैं आपको एक्स्ट्रा क्लास पढ़ा दूंगी लेकिन आपको सीरियस होकर पढ़ना पड़ेगा । "
रिया की इतनी बात सुन मै मन ही मन खुश हुआ के चलो अब पढ़ाई भी हो जायेगी और साथ में टाइम भी स्पेंड होगा , यही सोचते सोचते मैं "ओके , थैंक यू मैम, मैं आज शाम से ही आ जाऊंगा" बोलकर खुश होता हुआ चैंबर से बाहर आ गया ।
मुझे मुस्कुराते हुए आता देख बाहर खड़ा आफताब बोला , " क्या हुआ मिया , मैडम ने पर्चा आउट कर दिया क्या जो इतना खुश हो रहे हो "
मैंने कहा ," नही मिया उससे भी ज्यादा खुशी की बात है , पर्सनल एक्स्ट्रा क्लासेज मिली है आपके भाई को ।
फिर हम यूंही बातें करते करते वापस हॉस्टल आ गए ।
शाम को 4 बजे से ही मैं ट्यूशन क्लास जाने के लिए तैयार होने लगा । मुझे तैयार होता देख आफताब बोला , अरे मिया बारात में जा रहे हो क्या जो इतना सज रहे हो , जमीन पर रहो , पढ़ने बुलाया है डेट पर नही ।
उसकी तरफ कंघा फेकते हुए मैने कहा ,"बेटा डेट पर भी जायेंगे बस अभी तो पढ़ ले " आफताब से यूंही छिड़ते चिड़ाते मैं तैयार हो 4:45 पर ही अपार्टमेंट के सामने वाले पार्क में पहुंच गया और रिया का इंतजार करने लगा , कुछ देर बाद वो अपनी व्हीलचेयर पर बाहर आई , काला सूट और दुपट्टा , माथे पर छोटी सी काली बिंदी , हाय क्या नूर बखसा है खुदा ने । मन हुआ के एक कविता यही लिख दू लेकिन फिर खयाल आया बेटा पढ़ने आए हो अभी पढ़ लो वर्ना एग्जाम में लग जायेंगे ।
इतने में ही रिया पास आ गई और बोली , " क्या बात शायर साहब आप तो वक्त के बहुत पाबंद निकले ।"
मैंने जी मैम बोलकर सिर हिला दिया
तब रिया बोली ,"अरे शायर साहब आप इस क्लास में सिर्फ रिया भी बुला सकते है ।
ये सुन मै मुस्कुराने लगा ।
तब रिया ने कहा चलिए चेयर लीजिए और बताइए क्या पढ़ना है ।
मैंने कहा वैसे तो सभी में दिक्कत है लेकिन पहले संधि ही पक्की कर लेते है।
रिया बोली ठीक है ।
बुक खोली और उन्होंने पढ़ाना शुरू कर दिया , उस दिन उनका पढ़ाया सब समझ आया बीच में एक ब्रेक हुआ उसमे उनका नौकर चाय लेकर आ गया , चाय पीते पीते रिया ने पूछा ," शायर साहब आपकी उम्र से लगता है आपने लेट पढ़ाई स्टार्ट की या १२वी के बाद छोड़ दी थी ?
मैंने कहा ," नही रिया जी इससे पहले मैं हिंदी से ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन और पीएचडी कर चुका हु ये बीए संस्कृत तो बस शौकिया कर रहा हु ।
इतना सुनकर रिया सप्राइज रह गई और बोली अरे वाह आप तो बड़े छुपे रुस्तम निकले इतने पढ़े लिखे है कभी बताया नही , चलिए अब हम भी आपको डॉक्टर रोहन बुलाया करेंगे ।
मैं मुस्कुराया और कहा नही रिया जी आप रोहन या शायर ही रहने दीजिए ।
चाय खत्म हुई और इसी तरह हंसते बात करते पहले ही दिन हमने आधा संधि प्रकरण पढ़ लिया और मुझे सब समझ भी आया ।
पहले दिन की क्लास खत्म हुई मैं वापस हॉस्टल आया , वहा आफताब मानो मेरा ही इंतजार कर रहा था , आते ही टांग खींचने के लहजे में बोला ,"और शायर साहब कैसी रही स्पेशल क्लास "
मैंने बस कहा , " सही रही "
आफताब बोला ,"अरे ....!!! बस सही रही ??
उसका मजे लेने का मूड भाप मैने कहा बेटा ज्यादा मजे ना लो वर्ना लतिया देंगे तुम्हे।
वो बोला ठीक है जी चलिए छोड़िए नही बताते तो रहने दीजिए ।
रात को खाना खा कर मैं जल्दी पढ़ने लगा अब एग्जाम को डेट आने के वजह से सबने कॉलेज ना जाने का निर्णय लिया था ।
धीरे धीरे दिन बीतते गए और मेरी शाम की ट्यूशन क्लास चलती रही ।
१० दिन में ही मेरा लगभग 70% सिलेबस कवर हो गया था ।
एक दिन सुबह से ही तेज बारिश होने लगी बारिश देख मैं बेचैन होता रहा के यार आज रिया को ना ही देख पाऊंगा और न ही पढ़ाई होगी ।
मुझे बेचैन देख बीच बीच में आफताब मेरे मजे लेता रहा के जनाब बड़े तड़प री हो एक ही दिन की तो बात है सब्र कर लो ।
खैर शाम को 4 बजे बारिश रुक गई और मैं जल्दी जल्दी तैयार हो क्लास के लिए निकल पड़ा , पार्क में जाकर देखा तो चारो तरफ कीचड़ हुआ था । मुझे पार्क में खड़ा देख रिया अपनी व्हीलचेयर ले बाहर आ गई और बिल्डिंग के गेट पर आकर मुझे आवाज लगाई ।
मैं जैसे ही उस और मुड़ा तो देखा बिल्डिंग के अंदर से एक कुत्ता भागते हुए आया और उसकी व्हीलचेयर में टक्कर मारते हुए चेयर को आगे धकेल दिया , आगे ढलान होने के वाह से और अचानक धक्का लगाने से रिया बैलेंस नही बना पाई और चेयर सहित आगे को और गिर गई ।
मैं तेजी से उसकी तरफ भागा
मुझे कुछ समझ नही आया , वो आगे कीचड़ में गिर गई थी और उसके माथे पर लगी थी जिससे खून निकलने लगा था मैने उसपर अपना रुमाल रख दिया और बिना कुछ सोचे उसे गोद में उठा लिया तभी आवाज सुनकर उसकी मेड पुष्प भी बाहर आ गई उसने रिया की चेयर सीधी की लेकिन मैने उससे कहा चेयर अपार्टमेंट में ले चलो , पुष्प आगे आगे चल दी और मैं उसके पीछे रिया को ऐसे ही गोद में लिए , इन कुछ कदमों की दूरी में मैं बस उसकी बंद हुई आंखो को देखता रहा था
जैसे ही हम अपार्टमेंट के अंदर पहुंचे मैंने रिया को उसके बेड पर लिटा दिया उसके कपड़े थोड़े खीचड़ में सन चुके थे लेकिन अभी वो थोड़ा घबराई सी आधे होश में थी मैं वही पास ही खड़ा रहा । इतने में पुष्प फर्स्ट एड बॉक्स ले आई और मैंने रुमाल हटा उसकी चोट पर पट्टी कर दी ।
लगभग 15 मिनट बाद वो पूरी तरह होश में आई । मुझे देख वो एकदम चुप रही मैने उसकी ओर देखा और एक स्माइल पास करते हुए कहा सॉरी रिया जी मेरी वाह से आपको इतनी चोट लग गई उसने कहा अरे कोई बात नही तुम गिल्ट फील मत करो ।
मैंने हम्म्म में सिर हिलाया और बोला ," आप चेंज कर लीजिए में बाहर से दबाई ले आता हु ।
रिया ने कहा , नही दबाई की जरूरत नही है मैं चेंज कर लेती हु ।
पुष्प उसको बाथरूम तक ले गई , मैं उसके बाहर आने तक यूंही खड़ा रहा ।
वो बाहर आकर बेड पर बैठ गई और मुझे पास ही पड़े सोफे पर बैठने का इशारा किया । मैं सोफे पर बैठ गया ।
रिया ने पुष्प से चाय लाने को कहा वो चाय बनाने किचन में चली गई।
हम कुछ देर यूंही एक दूसरे को देखते रहे फिर मैने हमारे बीच की चुप्पी तोड़ते हुए उससे हिम्मत करके पूछा ," रिया जी आपकी फैमिली कहा है और ये सब कैसे हुआ ?
कुछ देर चुप रहने के बाद उसने कहा ," मेरी फैमिली हरियाणा के रोहतक में रहती है घर में 2 बड़े भाई मम्मी पापा है लेकिन अब मेरा उनसे कोई संबंध नही है और व्हीलचेयर पर मैं एक एक्सीडेंट की वजह से हूं ।
मैंने फिर हिम्मत जुटाई और पूछा कैसा एक्सीडेंट और आप फैमिली के साथ क्यू नही हो ?
उसने मुस्कुराते हुए कहा अरे शायर साहब बहुत लंबी कहानी है आप कहा तकलीफ उठा रहे है ।
तभी पुष्प चाय ले आई , हमने अपनी अपनी चाय उठाई । मैंने चाय का पहला घूट पीते हुए कहा," मेरे पास काफी समय है अगर आप सहज है तो प्लीज बताइए ना .
उसने भी चाय का घूट भरते हुए कहा ,
"2.5 साल पहले मैं भी तुम्हारी तरह बिल्कुल ठीक थी , अपने पांव पर चलती थी । दिल्ली यूनिवर्सिटी से एमए करते हुए मुझे एक लड़के से प्यार हो गया था जिसका नाम सिद्धांत गोयल था । हम एक दूसरे से शादी करना चाहते थे लेकिन जब मैंने अपनी फैमिली को उसके बारे में बताया तो एक टिपिकल हरयाणवी फैमिली की तरह उन्होंने शादी से बिल्कुल इनकार कर दिया । हम दोनो ने काफी कोशिश की उन्हें मानने की लेकिन वो लोग नही माने । अंत में हम दोनो ने भाग कर शादी कर ली और दिल्ली में ही रहने लगे लेकिन हमे ढूंढते हुए एक दिन मेरे भाई को उसके 2 दोस्त हमारे घर तक पहुंच गए और मुझे जबरदस्ती ले जाने लगे तभी सिद्धांत और उनमें झगड़ा होगा और भाई के एक दोस्त ने कट्टा निकाल सिद्धांत पर गोली चला दी , मैं दौड़ कर बीच में आई लेकिन गोली सिद्धांत के पेट में लगी और उसके कुछ छर्रे मेरी कमर में । भाई और उसके दोस्त हमे वही छोड़ भाग गए । गोली की आवाज सुन लोग इकट्ठा हुए , सिद्धांत ने हॉस्पिटल ले जाते हुए दम तोड दिया और मेरा बैक का ऑपरेशन हुआ जान तो बच गई लेकिन छर्रे मेरी स्पाइनल कॉर्ड में लग गए थे जिससे मैं इस व्हीलचेयर पर आ गई डॉक्टर्स ने उस समय कहा था के 5 साल बाद एक और मेजर सर्जरी होगी उसके बाद 5% चांसेज है की शायद में फिर से चल पाऊंगी । "
रिया ने एक सांस में रुहासे गले से अपनी कहानी बयान करदी , उसकी कहानी सुन मेरी भी आंखे नम हो गई और मैने बिना सोचे उसे हग कर लिया । कुछ सेकेंड बाद मुझे एहसास हुआ तब मैं उससे दूर हुआ । मेरे यू अचानक हग करने से वो भी हैरान रह गई ।
मैंने सॉरी रिया बोला ।
वो चुप रही ।
मैंने फिर कहा , " तुमने उन लोगो को सजा नही दिलवाई ।
उसने कहा ," मेरा भाई और उसके दोस्त उम्र कैद की सजा काट रहे है जिसके वजह से मैंने अपना घर छोड़ दिया और यहां आकर पढ़ाने लगी । "
मैंने फिर एकबार उसकी ओर देख और इस बार बस देखता रहा ।
हमारी चाय खत्म हो चुकी थी ।
तभी रिया ने कहा, " मिस्टर ज्यादा भावुक मत होइए अब यही मेरी लाइफ है और 4 दिन बाद आपके एग्जाम है जाइए पढ़िए"
मैंने कहा ," जी रिया जी , आपको मेरी कभी भी कोई भी हेल्प चाहिए तो बेझिझक बताएगा ।" इतना कह मैं उसको बाय बोलकर हॉस्टल की ओर वापस आने लगा , हॉस्टल आते हुए मेरे दिमाग में उसकी ही कहानी दौड़ रही थी की इतने खुश दिखने वाले चेहरे के पीछे कितना दर्द छुपा है वो भी अपनो के द्वारा दिया गया दर्द ।
मैं हॉस्टल वापस आ चुका था , रूम में आते ही आफताब ने मेरा सोच में डूबा चेहरा देख कहा , " क्यू मिया आज इतना लेट कैसे हो गए और इतना शांत भी हो , सब ठीक तो है ?
मैंने हां सब ठीक है बस इतना जवाब दिया और अपने बेड पर जाकर बैठ गया उस शाम मुझे भूख नही लगी , कई बार पढ़ने की कोशिश की लेकिन बार बार रिया की बातें दिमाग में घूम रही थी ।
ऐसे ही बैठे बैठे रात के 12 बज चुके थे , मैने अपनी डायरी उठाई और उसपर बस एक लाइन लिखी ,
" अब तुम्हारी आंखों में कभी आंसू नही आने दूंगा " ।
मुझे पता था के उसके साथ इतना सब होने के बाद शायद ही वो फिर से किसी से प्यार करने के लिए खुद को तैयार कर पाए लेकिन अब मैं उससे प्यार के बदले प्यार की कोई उम्मीद लिए बिना उसको सारी खुशियां देना चाहता था । यही सोचते सोचते मेरी कब आंख लग गई मुझे नही पता चला अगले दिन सुबह मेरी आंख खुली , मैं नहाने के बाद पूजा कर रिया के लिए प्रसाद ले उसके घर पहुंच गया ।
इतनी सुबह सुबह मुझे देख वो मुस्कुराते हुए बोली , अब क्या हुआ शायर साहब आज इतनी सुबह सुबह ।
मैंने कहा , "रिया जी आज सोमवार है और सोमवार को मैं भगवान शिव का व्रत करता हूं , आपके लिए भोलेनाथ का प्रसाद लाया हूं और वैसे भी कल की क्लास का अपने नुकसान कर दिया था तो भरपाई तो करनी थी , मैने आखिर में हंसते हुए कहा "
मेरी बात सुन उसने भी हंसते हुए प्रसाद लिया और कहा , शायर साहब आप तो बड़े मतलबी स्टूडेंट हो यार ।
मैंने कहा जी बिलकुल । अगर आप अच्छा फील कर रही है तो बाकी का सिलेबस कर लेते है ताकि गरीब पास हो सके । यहां बात सिलेबस की नही थी उसको खुश रखने और अकेला ना फील होने देने की मेरी कोशिश को शायद वो भी समझ गई थी ।
उसने मुस्कुराते हुए बिना बुक के एक टॉपिक पढ़ना स्टार्ट किया मैं उसको देखते देखते पढ़ता गया ।
एग्जाम से पहले मेरा लगभग सारा सिलेबस कंप्लीट होगा और एग्जाम्स भी हो गए कुछ दिन बाद रिजल्ट आया ।
ये क्या रिजल्ट में मैने अपनी क्लास में टॉप किया था , पूरे 74% मार्क्स के साथ।
रिजल्ट देख मैं एक मिठाई का डब्बा ले सीधा रिया के केबिन में पहुंच गया ।
रिजल्ट मुझसे पहले उन्हें पता चल चुका था , मुझे सामने देख उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा ," मुबारक हो शायर साहब आप तो टॉप कर गए । अब तो पार्टी बनती है आपसे "
मैंने भी मुस्कुराते हुए कह दिया , अरे आप जब कहे तब पार्टी ।
रिया ने कहा चलिए आज शाम का डिनर आपकी तरफ से ।
उसके मुंह से खुद साथ डिनर करने की बात सुन मुझे यकीन नही हो रहा था एक पल के लिए मन में खयाल आया की बेटा रोहन लड़की कही प्यार में तो नही आ रही फिर खुद को याद दिलाया की नही वो पहले ही काफी कुछ झेल चुकी है अब शायद तुझे दोस्त मानती है इसलिए फालतू दिमाग मत लगा ।
मैं ये सब सोच ही रहा था तभी रिया ने कहा क्यू शायर साहब हिसाब लगाने लगे क्या , चलिए ज्यादा नही खाऊंगी ।
मैं सोचने से बाहर आया, " अरे नही रिया जी आप कैसी बात कर रही है । "
चलिए शाम को मिलते है मैं आपको शाम 7 बजे आपके घर से पिक कर लूंगा ।
इतना कहकर मैं खुशी खुशी उसके केबिन से बाहर आ गया और सीधा आफताब को जाकर सारी बात बताई और कहा कि मुझे शाम को तुम्हारी कार चाहिए ।
आफताब ने मजे लेने के मूड में कहा ," वाह बेटा , स्पेशल क्लास से सीधा डिनर डेट"
मैंने कहा चुप रहो तुम डेट जैसा कुछ नही है बस एक सिंपल सी ट्रीट है ।
ऐसी करते करते हम हॉस्टल वापस आ गए और मैं शाम होने का इंतजार करने लगा , शाम को मैं तैयार हो आफताब की गाड़ी ले रिया के घर पहुंच गया ।
वो अभी तैयार हो रही थी कुछ देर बाद बाहर आई उसे तैयार देख मैं कुछ देर के लिए उसे देखता रहा , आज वो हल्के आसमानी सूट में और दिन से भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी ।
उसे देख मेरे मुंह से निकल गया , " क्या बात रिया जी आज क्या सारा बाजार जाम करवाना है क्या "
वो बस मुस्कुराई और कहा चलो अब
मैं आगे बिना कुछ कहे उसकी व्हीलचेयर के पीछे पीछे चल दिया , कार के पास जाकर वो रुक गई मैने दरवाजा खोला और बैठने की कोशिश करने लगी , उसे सहज ना देख मैने उसे गोद में उठाया और गाड़ी की अगली सीट पर बैठा दिया। वो बिना कुछ कहे चुप मुझे देखती रही , मैं भी चुप ड्राइवर सीट पर बैठ गाड़ी चलाने लगा । कुछ दूर तक हम दोनो खामोश बैठे रहे फिर उसने चुप्पी थोड़ी और कहा , "क्यू शायर साहब गोद में उठाने का आप कोई मौका नहीं छोड़ते "
अचानक से ये सुन मैं थोड़ा असहज हुआ लेकिन मैं चुप रहा ।
उसने फिर कहा ," मुझे उस बारिश वाले दिन का भी याद है कैसे आपने एकदम उठा लिया था ।
मैं उसकी बातें बस सुने जा रहा था और मेरी धड़कने और बढ़ती जा रही थी ।
उसने एक बार फिर कहा, " शायर साहब कही प्यार व्यार तो नही करने लगे हो , याद रखना मैं एक विधवा हु और विकलांग भी ।
इस बार मैंने चुप्पी तोडी और खुद को संभालते हुए कहा ," ये कैसी बातें कर रही है आप । रिया जी आप एक जिंदादिल इंसान हो और वो सब जो मैने किया एक इंसान के तौर पर मेरा फर्ज था बाकी मैं आपको यहां अपना सबसे अच्छा दोस्त मानता हूं । "
मेरा ये झूठ मेरी लड़खड़ाती आवाज और उसकी तेज आंखो से बच नही पाया होगा लेकिन फिर भी उसने हंसते हुए कहा , बहुत अच्छे । मैं भी आपको बहुत अच्छा दोस्त मानती हु ।
इसी तरह और बातें करते करते हम एक रेस्टोरेंट पर पहुंच गए , मैं उसे उतरने में हेल्प कर चेयर पर बैठा अंदर ले गया ।
हमने डिनर किया और खून बातें की ।
वापस आते हुए फिर मैने उसको गोद में उठाकर गाड़ी में बैठाया , लेकिन ये क्या मेरे बिलकुल पास वाली गाड़ी के पास हमारे वही पहली बोरिंग क्लास वाले प्रोफेसर ने मुझे रिया को गोद में उठा गाड़ी में बैठते हुए देख लिया ।
मैंने रिया को ये नही बताया और सारे रास्ते यही सोचते हुए आया की वो क्या सोच रहे होंगे ।
अगले दिन मैं जल्दी जल्दी उठ , तैयार हो कॉलेज पहुंचा , रिया मुझसे पहले ही कॉलेज पहुंच चुकी थी , उस दिन सारा स्टाफ उसे अलग निगाह से देख रहा था और आपस में खुसरफुसर कर रहा था वो कुछ समझ नही पा रही थी लेकिन मैं सब समझ गया था ।
उस बुड्ढे ने सारे स्टाफ में कल रात वाली घटना फैला दी थी , अब सारा कॉलेज मुझे और रिया को अजीब निगाह से देख रहा था । लड़के मुझे ये कहकर छेड़ रहे थे के भाई ने तो मैडम ही फसा ली और गोद में उठा कर घूम रहा है ।
ये सब देखते हुए मैं सीधा रिया के केबिन में पहुंचा , वहा जाकर देख तो वो रो रही थी उसे रोता देख मेरा मन किया के उस बुड्ढे की जान ले लू लेकिन मैने खुद को संभाला और रिया को चुप कराया और कहा की मैं अब कभी उसके आस पास नही दिखूंगा ।
मेरे से ऐसा सुन रिया चुप होकर बोली ,"क्यू तुम डर गए क्या अरे लोगो का तो काम होता है इधर उधर की बातें करना , मैं इसलिए नही रो नही की लोग मुझपर कीचड़ उछाल रहे है मैं इसलिए रो रही थी के मैं जब भी खुश होती हु ये दुनिया लोग नजर लगाने लगते है , तुम बेफिक्र रहो हम ऐसे ही साथ रहेंगे , हमे हमारा रिश्ता पता है लोग क्या कहते है उससे फर्क नही पड़ता । "
रिया की हिम्मत देख मेरी आंखे नम गई और मैं बस "ठीक है " कहकर चला आया ।
अब हम अक्सर बाहर घूमने या खाने जाया करते थे ,लोग तब भी कॉलेज में तरह तरह की बाते करते थे लेकिन हम खुश थे हमे फर्क नही पड़ता था ।
देखते देखते मेरे फर्स्ट ईयर के एग्जाम हुए मैने उसमे भी टॉप किया ।
फिर एक और साल इसी तरह हंसते खेलते गुजरा मेरे सेकेंड ईयर के एग्जाम हुए मैने उसमे भी टॉप किया ।
सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था मेरे दोस्तो ने मुझे कई बार बोला की तुम लोग रिलेशनशिप में क्यू नही आ जाते , आफताब ने भी कई बार मुझे खूब उकसाया । एक बार तो उसने हद्द ही करदी , मेरे नाम से लव लेटर लिख रिया की टेबल पर रख आया लेकिन रिया मेरी राइटिंग पहचानती थी इसलिए उसने कॉलेज के किसी शैतान लड़के की हरकत समझ इग्नोर कर दिया ।
देखते देखते रिया की पहली सर्जरी को 5 साल हो गए और मेरे भी फाइनल ईयर के इंटरनल एग्जाम आ गए । एक दिन हम यूंही शाम को रिया के घर चाय पर मिले तब मैने उससे जिक्र किया की तुम्हारी सेकेंड सर्जरी का क्या प्लान है , उसने मेरी बात को सुनकर इग्नोर कर दिया , मैने उससे दोबारा पूछा लेकिन उसने फिर अनसुना कर दिया ।
मुझे कुछ गडबड लगी इसलिए मैने उस दिन जाने दिया । अगले दिन जब रिया कॉलेज चली गई तब मैं उसके घर गया और उसकी मेड पुष्पा से उसकी कैसे फाइल मंगवाई उसमे से उसके डॉक्टर का पता और फोन न निकल मैने उसके डॉक्टर से संपर्क किया ।
डॉक्टर ने मुझे बताया कि ,"हां उनकी सेकेंड सर्जरी का टाइम हो गया है हमने उनसे कुछ दिन पहले इस बारे में बात की थी लेकिन सर्जरी बहुत महंगी है इसलिए रिया मैडम ने कराने से मना कर दिया है"।
मैंने डॉक्टर से पूछा , कितना खर्चा आएगा डॉक्टर साहब ।
डॉक्टर ने उधर से रिप्लाई किया , "लगभग 15-20 लाख । हमे इस सर्जरी के लिए यूएस से कुछ स्पेशल मशीन और एक डॉक्टर्स की टीम बुलानी पड़ेगी ।"
डॉक्टर की बात सुनकर मैं सब समझ गया कि उस दिन रिया ने मेरी बात क्यू इग्नोर की थी इतनी बड़ी रकम उसकी पहुंच से बाहर की बात थी । मैंने डॉक्टर से पूछा , " कब तक करा सकते है डॉक्टर हम सर्जरी " डॉक्टर ने कहा , ज्यादा देर करना ठीक नही होगा 1 से 2 महीने में ही करनी पड़ेगी ।
मैं ये सुन सोच में पड़ गया सोचने लगा कैसे करू क्या करू क्यूंकि खुद से वादा किया था उसे खुशियां देने का और ये शायद सबसे अच्छा मौका था ।
मैंने शाम को हॉस्टल आकर सारी बात आफताब को बताई , वो भी सुनकर दंग रह गया और बोला कहा से लायेगा भाई इतनी बड़ी रकम । मैंने कहा कही से भी भाई बस उसको उसके पैरो पर चलते देखना है ।
इतना कहकर मैं और थोड़ी देर सोचने लगा फिर अचानक से घर मां को कॉल लगाया और पिछले 2-3 साल की सारी कहानी बता दी , मां को ज्यादा कुछ नहीं सूझा उसने कहा बेटा अपन भी कहा इतने अमीर है जो उस बिचारी की हेल्प कर सके । 10 बिगाह जमीन है और तुम दो भाई हो तेरे पापा की रिटायरमेंट का जो पैसा आया था उससे तेरी दोनो बहनों की शादी कर दी थी अब तो तुम्हारी ही नौकरी की आस है ।
मां की बात सुन मैं और सोच में पड़ गया तभी ध्यान 10 बिगाह वाली बात पर गया
मैंने सीधा पापा को कॉल किया और उन्हें भी सारी बातें बता दी और कहा मुझे मेरे हिस्से आने वाली जमीन बेचनी है ।
ये सुनकर पापा भड़क उठे और बोले , वो हमारी पुश्तैनी जमीन है और उसे तू एक लड़की के लिए बेचना चाहता है जिसका न ये पता है के वो ठीक होगी भी या नही और ये भी नही पता के वो तुझे प्यार भी करती है के नही ।
अंत में बोले बेटा इंसानियत दिखानी अच्छी बात है लेकिन औकात में रहते हुए दिखाओ ।
मैं कुछ सेकेंड के लिए चुप रहा और फिर बोला , क्या करोगे पापा ऐसी जमीन का जिससे बच्चो का पेट भी ना पल पाएगा आगे आने वाली पीढ़ियों में बस उसके बांट बांट के टुकड़े होते जायेंगे अभी मैं उससे किसी को एक नई जिंदगी दे सकता हु भले ही वो मुझसे प्यार करती हो या न करती हो लेकिन उसके साथ बिताए सालो में मैं सबसे ज्यादा खुश रहा हूं मैने उम्र भर के लिए एक दोस्त कमाई है उससे वादा किया है हमेशा खुश रखने का ।
मेरी बात सुन पापा थोड़ा समझे और बोले ठीक है जैसे तेरा मन करे कर हमसे मत बोलना बाद में के समझाया नही ।
मैं कर लूंगा कुछ दिन में किसी से जमीन की बात ।
पापा की बात सुन मैने कहा , " थैंक यू पापा । " थोड़ा जल्दी बताएगा और फोन रख दिया ।
पास खड़ा आफताब मेरी सारी बातें सुन रहा था , कॉल काटने पर बोला , " बड़े हाई लेवल के आशिक हो मिया , सलाम है तुम्हे पुश्तैनी जमीन बेचने को तयार होगी !!
मैं चुप उसकी बात सुन बाहर चला गया ।
अगले दो तीन दिन में पापा के कॉल का ही इंतजार करता रहा और रिया से भी नही मिला ।
ठीक पांच दिन बाद पापा का कॉल आया , " सुनो जमीन का सौदा हो गया है 15 लाख मिल रहे है तुम्हारे हिस्से के आ जाओ साइन कर जाओ " मैं उसी शाम घर पहुंच गया अगले दिन फॉर्मेलिटी पूरी कर पैसे लेकर वापस आ गया । और सीधा रिया के घर पहुंच गया ।
मुझे लगभग एक हफ्ते बाद देख रिया बोली कहा गायब हो गए थे शायर साहब इतने पैसे का सुनते ही क्या दोस्ती डगमगा गई थी क्या !! मैं समझ गया की डॉक्टर ने रिया को फिर से कॉल किया होगा और मैने इंक्वायरी की ये भी बताया होगा ।
मैंने बिना कुछ बोले बैग से पैसे निकाल उसकी गोद में रख दिए , पैसे देख उसकी आंखो में आंसू आ गए वो समझ गई के मैं इतने दिन पैसों के जुगाड में ही लगा था । फिर अचानक से उसने पूछा ," खा से आए इतने पैसे ?
मैंने कहा तुम ये मत पूछो बस अपनी सर्जरी पर ध्यान दो और जल्दी ठीक होकर वापस आओ ।
वो कहने लगी , " नही मैं तुमसे इतनी बड़ी रकम नही ले सकती वो भी उस रिश्क पे की मैं ठीक भी हो पाऊंगी या नही .।
मैंने कहा ," उधार समझ के रख लो जिंदगी भर चुकाते रहना इसी बहाने दोस्ती तो कायम रहेगी .
मेरी बात सुन वो नम आंखे कर मुस्कुराने लगी और मुझे हग करने के लिए आपने दोनो हाथ फैला दिए , मैने थोड़ा झुका उसने मुझे गले लगा लिया ।
कुछ सेकेंड बाद मैने कहा छोड़िए मैडम इतना भावुक मत होइए हम पूरा पैसा वापस लेंगे ब्याज सहित ।
कुछ देर बाद मैने डॉक्टर को फोन किया और सर्जरी की डेट और बाकी इंक्वायरी कर ली ।
सर्जरी की जो डेट मिली उस दिन मेरा थर्ड ईयर इंटरनल का आखिरी पेपर था ।
अब सर्जरी में सिर्फ 3 दिन बचे थे मैं पुष्पा और रिया को लेकर दिल्ली हॉस्पिटल के लिए निकल पड़ा , रिया को हॉस्पिटल में भर्ती करा , पुष्पा को उसके पास छोड़ मैं डॉक्टर्स से बात कर एग्जाम देने वापस हरिद्वार आ गया । 2 दिन बीत गए कल सुबह मेरा आखिरी एग्जाम और रिया की सर्जरी थी । मैं रात भर बेचैनी के मारे सो नही पाया एक तरफ एग्जाम दूसरी तरफ रिया की जिंदगी का सबसे अहम दिन । मैं सुबह 4 बजे उठा और तयार हो दिल्ली की बस पकड़ दिल्ली निकल पड़ा।
मैंने अपना एग्जाम छोड़ दिया था क्यूंकि मैं उस घड़ी रिया के साथ होना चाहता था
10 बजे में हॉस्पिटल पहुंच गया , 10:30 रिया की सर्जरी का टाइम था , मैं सीधा उसके पास पहुंचा , मुझे वहा देख वो शॉक हो गई और कहने लगी तुम यहां क्या कर रहे हो आज तो तुम्हारा एग्जाम था न ?
मैंने कहा हां था , छोड़ दिया
उसने कहा तुम पागल हो गए हो
मैंने कहा , हां
वो फिर से रोने लगी
मैंने उसे चुप कराया और बोला अब जल्दी से ठीक होकर आ जाओ फाइनल्स के लिए अच्छे से पढ़ा देना पास हो जाऊंगा मैं ।
वो निशब्द मुझे देखती रही ।
तभी एक डॉक्टर और नर्स आई और बोले चलिए सर कुछ साइन की फार्मल्टीज कर दिजिए और मैडम आप तब तक चेंज करके ये सर्जरी कॉस्ट्यूम पहन लीजिए ।
मैंने फॉर्म लिया और गार्डियन वाले कॉलम में अपने साइन कर दिए ।
नर्स ने रिया को सर्जरी वाले कपड़े पहना दिए और ले जाने लगे ।
मैंने रिया को रोक गले लगा लिया और अपने आंसू छुपाते हुए ऑल द बेस्ट बोलकर रूम से बाहर आ उसको ऑपरेशन थिएटर की तरफ ले जाते देखने लगा ।
सर्जरी शुरू हुई मैं ओटी के बाहर ही भोलेनाथ को याद करते हुए हर पल उसके लिए दुआ मांगते हुए घूमने लगा करें 5 घंटे बाद डॉक्टर्स की टीम बाहर आई और उनके हेड ने मुझे आवाज लगाई , " मुबारक हो मिस्टर रोहन सर्जरी सक्सेसफुल रही है 3-4 घंटे में उन्हें होश आ जायेगा तब हम उन्हे उनके रूम में शिफ्ट कर देंगे आप उनसे तब मिल सकते है ।
मैं डॉक्टर की बात सुन खुशी के मारे उछल पड़ा और बेशब्री से इंतजार करने लगा । रिया को होश आया उसके वार्ड में उसे शिफ्ट किया गया , मैं एक मिनट ना गवाते हुए उसके पास पहुंच गया ।
हम कुछ देर एक दूसरे को नम आंखों से देखते रहे फिर मैने कहा ," चलिए मैडम अब चलकर दिखाइए " पास खड़ी नर्स मुस्कुराते हुए बोली सर एक हफ्ता इनको रेस्ट करने दीजिए फिर इनको चलाएगा ।
मैं मुस्कुरा दिया ।
एक हफ्ते बाद हम लोग वापस हरिद्वार आ गए , अब रिया आपने पैरो पर खड़ी होने लगी थी लेकिन पिछले पांच सालों से ना चलने के कारण उसकी पांव की मसल्स काफी स्टिफ और वीक हो गई थी , डॉक्टर्स ने उसको कुछ एक्सरसाइज और फिजियोथेरेपी सेशन बताए थे ।
मैं अब अपना अधिकतर टाइम रिया के पास ही उसकी देखभाल और एक्सरसाइज करवाने में बीता देता , रिया कई बार कहती के तुम कॉलेज जाया करो लेकिन मैं अनसुना कर देता और घर पर ही उससे पढ़ता रहता । अब रिया धीरे धीरे अपने पैरो पर चलने लगी थी और मेरे भी फाइनल एग्जाम आ गए थे । मैं पूरी मेहनत कर रहा था क्युकी इंटरनल का स्कोर भी कवर करना था । एग्जाम हुए और मैं पास भी हो गया यूएस दिन मुझसे ज्यादा खुशी से रिया नाच रही थी और उसे उसके पैरो पर देख मैं अलग ही दुनिया में खोया खुश हो रहा था लेकिन अंदर ही अंदर दुखी भी था के अब उसे और कॉलेज को छोड़ कर जाने का टाइम आ गया था । लेकिन दिल की बात अभी भी कहनी बाकी थी एक रोज सोचा के के दू लेकिन इस डर से खुद को रोक दिया के कही वो ये न समझे के मैं अपनी हेल्प के बदले उससे उसका प्यार मांग रहा हु और एक दोस्त भी खो दू मैं ।
अगले दिन मैंने अपना सामान पैक करना स्टार्ट किया मुझे मेरी वो डायरी नही मिल रही थी जिसमे मैं अक्सर लिखा करता था , मैं सारा समान पैक कर रिया के घर अलविदा कहने पहुंच गया , उसके सोफे के पास ही एक जगह मेरी वो डायरी रखी थी , मैने रिया से कहा अरे इसे तो मैं सारे हॉस्टल में ढूंढ लिया और ये यहां है।
रिया मुस्कुराई और बोली रख लीजिए शायर साहब अपनी अमानत सही सलामत है ।
उसकी ये बात सुनकर खयाल आया के कह दू की सबसे बड़ी अमानत तो यही छोड़ के जा रहा हूं , तुम्हे छोड़ के जा रहा हू अब शायद की कभी साल भर में मिला करे , लेकिन बिना कुछ कहे वो।डायरी वापस बैग में रख उसे अलविदा कह चलने को तैयार हुआ तभी रिया ने एकदम से गले लगाया लिया और रोने लगी , मानो कहना चाहती हो के मत जाओ ।
मैं भी यही चाहता था की वो बस एक बार रोक ले लेकिन दोनो ही कुछ ज्यादा ही समझदार हो गए थे ।
कुछ सेकंड के हग के बाद हम अलग हुए और मैं एक बार फिर अपने आंसू छुपाते हुए उसको झुकी नजरो से बाय बोल बिना पीछे मुड़े देख घर से बाहर आ गया क्यूंकि अगर एक बार भी मूड कर देखा होता तो शायद में कभी वापस जा पाता ।
उसके घर के बाहर खड़े ऑटो में समान रख में हरिद्वार बस स्टैंड की ओर चल पड़ा , सारे रास्ते मुझे पिछले तीन सालों में रिया के साथ बिताए एक एक पल की यादें स्लाइड की तरह दिखाई दे रही थी ।
बस स्टैंड पहुंच कर मैं बिजनौर वाली बस में बैठ बस चलने का इंतजार करने लगा तभी मुझे खयाल आया के अपने इस आखिरी लम्हे को भी डायरी में लिख दू , मैने उस एक लाइन (" अब तुम्हारी आंखों में कभी आंसू नही आने दूंगा ") के बाद कुछ एक साल से कुछ भी लिखा था ।
मैंने बैग से डायरी निकाली और आखिरी पन्ना खोल कर देख मेरी लिखी लाइन के बाद कुछ लिखा था
" सारी दुनिया की खुशियां दे कर भी आज रुला कर जा रहे हो , क्यू जा रहे हो मत जाओ ना "
मैंने जैसे ही ये लाइन पढ़ी मेरी धड़कने बढ़ गई । ये तो रिया की राइटिंग थी ।
बस चलने लगी , मैं जल्दी जल्दी अपना सामान समेट चलती बस से उतरा और पास खड़े ऑटो में समान डाल हड़बड़ाहट में बैठते हुए ऑटो वाले से बोला , संस्कृत विश्वविद्यालय टीचर्स अपार्टमेंट चलो भैया जल्दी ।
ऑटो वाला भी इमरजेंसी समझ फुल स्पीड पकड़ एकदम पहुंचा दिया ,
मैं रिया के बिल्डिंग के बाहर खड़ा था और वो अभी भी वही बाहर गार्डन में बैठे हुए रो रही थी मुझे देख वो दौड़ी चली आई और मेरे गले से लग गई , इस बार मैंने भी उसे टाइट हग कर लिया कुछ मिनट तक हम ऐसे ही लिपटे रहे और रोते रहे तभी ऑटो वाले ने हॉर्न बजाया ," भैया पैसे तो देदो "
मैं और रिया एक दूसरे से अलग हुए मैने ऑटो वाले को पैसे देकर भेज दिया ।
रिया और मैं मेरा सामान लेकर वापस उसके रूम में आ गए ।
रूम में आते ही वो बोली शायर साहब अब तो आई लव यू बोल दो या टीचर से ही पहले बुलवाओगे !!
मैं हंसने लगा और बोला आई लव यू रिया मैम !!
वो हंसते हुए बोली , ओके स्टूडेंट , आई लव यू टू ।
हम घंटो ऐसे ही बातें करते रहे दोनो आज इस धरती पे सबसे ज्यादा खुश थे।
शाम को मैंने घर पापा को कॉल किया और बताया कि मैं अगले हफ्ते शादी कर रहा हु रिया से ।
पापा ने कहा बेटा बहु मर्जी से चुन ली शादी तो हमे करने दे ।
मैंने हंसते हुए जवाब दिया ठीक है पापा
कुछ दिन बाद बिजनौर में हमारी शादी हुई और शादी के बाद मैने भी संस्कृत विश्वविद्यालय में हिंदी साहित्य के टीचर का इंटरव्यू दिया और मेरी भी वही नोकरी लग गई ।
अब हम उसी कॉलेज में पति पत्नी जाते है जिसमे कभी मिले थे । पूरा कॉलेज हमारे प्यार की मिशाल देता है ।
लेकिन आज भी ना मैं जान पाया की रिया उस मूर्ति से क्या बातें करती थी और न रिया जान पाई के उसकी सर्जरी के पैसे कहा से आए थे ।
शायद यही हमारे प्यार की बुनियाद और हमारे सबसे बड़े राज थे ।
""""""'''The End""""""""
All characters are fictional any resemblance with any living person will be a co incidence 🥰
With love : From :- Aashu Kumar
Thank you for reading please give your valuable comments and share with your friends ❤️❤️
😍😍
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जवाब देंहटाएंबहुत खूब 👏👏👏
जवाब देंहटाएंGajb 👍 bro
जवाब देंहटाएंBest story bhaiji👌🔥🔥
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