Bihar wala Ishq | तुम और बिहार |

 तुम और बिहार


मुजफ्फरपुर की लीची वाली मिठास हो तुम,

पटना के गोलगप्पे की खटास हो तुम।

गंगा घाट की गूंजते कलकल सी आवाज हो तुम,

मेरे जीने मरने का अंदाज हो तुम।


महावीर मंदिर के घंटी की आवाज हो तुम,

पटना साहिब की अरदास हो तुम।

इलाहाबाद के अमरूद से भी लाजवाब हो तुम,

मेरे धड़कन की आवाज हो तुम।



बनारस की मीठी पान हो तुम,

नालंदा विश्वविद्यालय की ज्ञान हो तुम।

ककोलत के झरने के समान हो तुम,

मेरे अंदाज-ए जिन्दगी का अरमान हो तुम।


गांधी सेतु के समान विशाल हो तुम,

सोनपुर मेले के समान कमाल हो तुम।

गाय घाट की चाय की गर्माहट हो तुम,

हमारे जैसे आशिको की चाहत हो तुम।

              

               ----- अमर्त्य कुमार बादल

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