मां अपने लिए अक्सर लेट हो जाती है

 माँ अपने लिए अक्सर लेट हो जाती है

सुबह सबसे पहले उठकर वो घर वो स्वर्ग बनाती है 
सबके स्कूल ,ऑफिस जाने के बाद ही कुछ खाती है 
माँ अपने लिए अक्सर लेट हो जाती है

खुद का उपवास होने पर भी 
वो सबको पकवान खिलाती है
माँ अपने लिए अक्सर लेट हो जाती है

खाने की टेबल पर भी वो पहले सबको खिलाती है बाद मे खुद खाती है
माँ अपने लिए अक्सर लेट हो जाती है
Maa , mother love poetry



पिता जी भी कहते है तुम सजने मे कितना वक़्त लगती हो 
उन्हें क्या पता माँ पहले बच्चो को राजा बनाती है 
माँ अपने लिए अक्सर लेट हो जाती है

अक्सर ख्वाइशे पूरी होती है घर में सबकी 
उसकी बारी कहा ही आती है 
मां अपने लिए अक्सर लेट हो जाती है 

सारे घर की जरूरतें याद रहती है उसे 
उसकी जरूरत कहा ही किसी को नजर आती है 
मां अपने लिए अक्सर लेट हो जाती है


होली - दीवाली पर भी पहले सारे घर को शॉपिंग कराती है बाद मे खुद के लिए कुछ लाती है 
माँ अपने लिए अक्सर  लेट हो जाती है

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